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  • तकनीक से जुड़ी 100 चीजों को टाइम कैप्सूल में नोबेल विजेताओं द्वारा जमीन में दफनाया गया
    2019-01-24


    तकनीक से जुड़ी 100 चीजों को टाइम कैप्सूल में नोबेल विजेताओं द्वारा जमीन में दफनाया गया

    05.01.2019

    लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) में जारी 106वीं इंडियन साइंस कांग्रेस कार्यक्रम के दौरान 100 विभिन्न चीजों को एक टाइम कैप्सूल में रखकर नोबेल पुरस्कार विजेताओं के द्वारा जमीन में दफनाया गया। इस टाइम कैप्सूल को जमीन में दफनाने का मुख्य उद्देश्य आज से 100 साल बाद उस समय के लोगों द्वारा वर्ष 2019 के दशक में जारी टेक्नोलॉजी का ज्ञान कराना है। इस कैप्सूल को नोबेल पुरस्कार विजेता बायो केमिस्ट अवराम हर्षको अमेरिकन फिजिसिस्ट डंकन हालडन के द्वारा इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की सहायता से जमीन के अंदर 10 फीट की गहराई में दबाया गया। यह कैप्सूल 100 साल तक धरती के अंदर सुरक्षित रूप से दबा रखा जाएगा। इस कैप्सूल के अंदर मंगलयान, ब्रह्मोस मिसाइल, तेजस फाइटर जेट आदि के मॉडल के अलावा लैंडलाइन टेलीफोन, स्मार्टफोन, स्टीरियो प्लेयर, स्टॉपवॉच, वेइंग मशीन, वाटर पंप, हेडफोंस, हैंडीकैम, पेनड्राइव, कंप्यूटर पार्ट्स (जैसे-हार्ड डिस्क, माउस, मदर बोर्ड) तथा वैज्ञानिक उपकरण (जैसे-रियो स्टेट स्पेक्ट्रोस्कोप, डबल माइक्रोस्कोप) आदि चीजों को शामिल किया गया है।

    एलपीयू के चांसलर अशोक मित्तल द्वारा बताया गया कि भविष्य की पीढ़ियों को आज के समय का नॉलेज प्रदान करने के उद्देश्‍य से टाइम कैप्सूल को जमीन के अंदर दफनाया गया है। उनके अनुसार आज से 100 साल बाद इन चीजों को देखकर उस समय के लोगों को काफी आश्चर्य का अनुभव होगा। इस टाइम कैप्सूल को एलपीयू के इलेक्ट्रॉनिक्स, मैकेनिकल, फैशन, एग्रीकल्चर, डिजाइन तथा कंप्यूटर आदि विभागों के 25 से अधिक विद्यार्थियों के द्वारा तैयार किया गया है।


    Points to be Remember:-

    • लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) में जारी 106वीं इंडियन साइंस कांग्रेस कार्यक्रम के दौरान 100 विभिन्न चीजों को एक टाइम कैप्सूल में रखकर नोबेल पुरस्कार विजेताओं के द्वारा जमीन में दफनाया गया।
    • एलपीयू के चांसलर अशोक मित्तल के अनुसार इस टाइम कैप्सूल को जमीन में दफनाने का मुख्य उद्देश्य आज से 100 साल बाद उस समय के लोगों द्वारा वर्ष 2019 के दशक में जारी टेक्नोलॉजी का ज्ञान कराना है।
    • इस टाइम कैप्सूल को एलपीयू के इलेक्ट्रॉनिक्स, मैकेनिकल, फैशन, एग्रीकल्चर, डिजाइन तथा कंप्यूटर आदि विभागों के 25 से अधिक विद्यार्थियों के द्वारा तैयार किया गया है।

    By-Amar Singh Silawat

    Source: dainikbhaskar.com


     

  • बम तलाशने वाले रोबोट को तैनात किया गया
    2019-01-22


    बम तलाशने वाले रोबोट को तैनात किया गया

    04.01.2019

    जालंधर में 3 जनवरी 2019 को इंडियन साइंस कांग्रेस की शुरुआत की गई। 7 जनवरी 2019 तक आयोजित की जाने वाली यह 106वी इंडियन साइंस कांग्रेस है। साइंस कांग्रेस के पहले दिन बेंगलुरु के सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड रोबोटिक्स केयर के द्वारा मिनी यूजीबी रोबोट को प्रस्तुत किया गया। यह रोबोट खतरे वाले स्थान पर पहुंचकर बम या संदिग्ध दिखाई देने वाली वस्तु को तलाश करने में सक्षम है। इस रोबोट को रिमोट से ऑपरेट करने की आवश्यकता नहीं पड़ने की वजह से यह स्वयं दूसरे रोबोटों के साथ को-ऑर्डिनेट करने में सक्षम है। यह रोबोट सीढ़ियों पर चढ़ने में सक्षम है। इसके द्वारा विस्फोटक पर पानी छिड़का जा सकता है यह दो से ढाई किलो वजन के संदिग्ध सामान को उठाकर दूर ले जा सकने में सझम है। डीआरडीओ के चेयरमैन सतीश रेड्डी द्वारा मिनी यूजीबी का परीक्षण सफल बताया गया है।


    साइंस कांग्रेस कार्यक्रम के दौरान डीआरडीओ द्वारा चंडीगढ़ के टर्मिनल ब्लास्टिक रिसर्च लैब में विकसित की गई प्लास्टिक बुलेट  को भी पेश किया गया। इन नवीन विकसित बुलेट को ak-47 राइफल से भी फायर किया जा सकेगा। इस बुलेट की विशेषता यह है, कि यह सामान्य बुलेट से 10 गुना कम वजन की होने के साथ इसके द्वारा 10 से 12 मिलीमीटर गहराई तक शरीर में घाव किया जा सकेगा। परन्‍तु इस गोली के प्रयोग से जानलेवा चोट नहीं की जा सकेगी। इस बुलेट का विकास प्रिंस शर्मा द्वारा किया जाकर इनका वर्तमान में निर्माण महाराष्ट्र की वरणगांव की ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में किया जा रहा है।


    साइंस कांग्रेस कार्यक्रम के दौरान टर्मिनल ब्लास्टिक रिसर्च लैब (टीबीआरएल) के निदेशक मंजीत सिंह द्वारा लैब में एयरक्राफ्ट मार्शल के लिए खास फ्रेंजीबिल बुलेट एंटी हाईजैकिंग ऑपरेशन में इस्तेमाल के लिए विकसित की गई है। इस बुलेट के इस्तेमाल से आतंकवादियों को मारे जा सकने के अलावा आतंकवादियों को घायल करने के लिए भी किया जा सकता है। इन गोलियों को इस प्रकार से निमिर्त किया गया है, कि यदि इनके इस्‍तेमाल के दौरान इनके एयरक्राफ्ट की बॉडी से टकराने पर बॉडी पर केवल हल्का सा दाग ही आयेगा। यह बुलेट एयरक्राफ्ट की बॉडी से टकराकर उसमें छेद नहीं करेगी तथा गोली पाउडर बनकर बिखर जाएगी।


    Points to be Remember:-

    • जालंधर में 3 जनवरी 2019 को इंडियन साइंस कांग्रेस की शुरुआत की गई। 7 जनवरी 2019 तक आयोजित की जाने वाली यह 106वी इंडियन साइंस कांग्रेस है।
    • बेंगलुरु के सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड रोबोटिक्स केयर के द्वारा मिनी यूजीबी रोबोट को प्रस्तुत किया गया।
    • डीआरडीओ द्वारा चंडीगढ़ के टर्मिनल ब्लास्टिक रिसर्च लैब में प्लास्टिक बुलेट  विकसित की गई।
    • टर्मिनल ब्लास्टिक रिसर्च लैब (टीबीआरएल) के निदेशक मंजीत सिंह द्वारा लैब में एयरक्राफ्ट मार्शल के लिए खास फ्रेंजीबिल बुलेट एंटी हाईजैकिंग ऑपरेशन में इस्तेमाल के लिए विकसित की गई है।
    • यह बुलेट आतंकवादी ऑपरेशन के दौरान एयरक्राफ्ट की बॉडी से टकराकर उसमें छेद नहीं करेगी तथा गोली पाउडर बनकर बिखर जाएगी।
    • यह सामान्य बुलेट से 10 गुना कम वजन की होने के साथ 10 से 12 मिलीमीटर गहराई तक शरीर में घाव करने में सक्षम होगी।

    By-Amar Singh Silawat

    Source:-dainikbhaskar.com


  • दुनिया का सबसे ऊंचा पुल चिनाब नदी पर तैयार
    2019-01-22


    दुनिया का सबसे ऊंचा पुल चिनाब नदी पर तैयार

    04.01.2019

    भारत में जम्मू कश्मीर के रियासी जिले में बक्कल और कौड़ी के बीच चिनाब नदी पर दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल इस साल बनकर तैयार हो जाएगा। इस रेलवे ब्रिज की लंबाई 1.3 किलोमीटर है, जो नदी तल से 359 मीटर ऊंचाई पर स्थित है। इसकी ऊंचाई 324 मीटर ऊंचे एफिल टावर से 35 मीटर अधिक है। इस रेल्‍वे ब्रिज पर बनाया गया सबसे ऊंचा खंबा 340 मीटर है। ब्रिज पर दो रेलवे ट्रेक बनाए जाएंगे जिसमें प्रत्येक की चौड़ाई 14 मीटर रखी गई है। इसके अलावा इसमें 1.2 मीटर चौड़ा रास्ते का निर्माण भी किया जाएगा। इस रास्‍ते का प्रयोग निरीक्षण कार्यों के लिए किया जाएगा। जम्मू कश्मीर में कोंकण रेलवे के अंतर्गत उधमपुर श्रीनगर बारामुला रेल लिंक परियोजना के तहत इस रेलवे ब्रिज का निर्माण किया जा रहा है। ब्रिज के निर्माण करने में लगभग 1200 करोड़ रुपए का खर्च आया है। ब्रिज के निर्माण कार्य को पूरा करने में देश के 15 बड़े संस्थानों की मदद ली गई है, जिसमें से डीआरडीओ भी एक है। इस ब्रिज के निर्माण के दौरान सुरक्षा का विशेष ध्‍यान रखते हुए इसमें ब्लास्ट लोड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है। जिसकी वजह से इस पर किसी भी प्रकार के विस्फोट या प्रेशर का असर नहीं हो सकेगा। इस ब्रिज की नींव तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई के द्वारा रखी गई थी।


    111 किलोमीटर लंबे कटरा और बनिहाल रेलवे मार्ग पर रेल ब्रिज के निर्माण होने से कश्मीर रेल मार्ग के माध्यम से देश के अन्य भाग से सीधे जुड़ सकेगा। वर्तमान में बनिहाल और बारामूला के बीच रेल संपर्क मौजूद है, परन्‍तु कटरा बनिहाल के बीच में रेल सुविधा मौजूद नहीं है। यह क्षेत्र भूकंप के हिसाब से सेसमिक जोन चार के अंतर्गत आता है। सुरक्षा की दृष्टि से इस पुल का निर्माण सेसमिक जोन 5 के अंतर्गत किया गया है। चिनाब नदी पर इस रेलवे ब्रिज को बनाने में मेहराब तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसे हैंगिंग आर्च के नाम से भी जाना जाता है। यह ब्रिज 266 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाओं का सामना करने में सक्षम है। ब्रिज के निर्माण में लगभग 29000 मेट्रिक टन इस्पात का इस्तेमाल किया गया है। यह ब्रिज 345 किलोमीटर लम्‍बे उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक प्रोजेक्ट का भाग है। इस प्रोजेक्‍ट के 52 किलोमीटर रेलमार्ग पर 17 टनल तथा 23 ब्रिजों का निर्माण किया गया है।


    Points to be Remember:-

    • भारत में जम्मू कश्मीर के रियासी जिले में बक्कल और कौड़ी के बीच चिनाब नदी पर दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल इस साल बनकर तैयार हो जाएगा।
    • रेलवे ब्रिज की लंबाई 1.3 किलोमीटर है, जो नदी तल से 359 मीटर ऊंचाई पर स्थित है।
    • ब्रिज की ऊंचाई 324 मीटर ऊंचे एफिल टावर से 35 मीटर अधिक है
    • ह ब्रिज 345 किलोमीटर लम्‍बे उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक प्रोजेक्ट का भाग है।

    By-Amar Singh Silawat

    Source:-dainikbhaskar.com


  • रेल्वे द्वारा नई तकनीक के उपयोग से ट्रेनों की लेटलतीफी समस्या से निजात पाने की तैयारी
    2019-01-16


    रेल्वे द्वारा नई तकनीक के उपयोग से ट्रेनों की लेटलतीफी समस्या से निजात पाने की तैयारी

    31.12.2018

    तकनीक की सहायता से भारतीय रेल्वेे के द्वारा ट्रेनों की समय-सारिणी सुधारने का कार्य, ट्रेन की ऑनलाइन मॉनीटरिंग की व्यरवस्था के अलावा यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम की सहायता से ट्रेनों को समय पर चलाने की व्यवस्था की जाएगी। रेल्वे द्वारा अचानक से इंजन, कोच में खराबी को रोकने के उद्देश्य से ट्रेन का इंजन, कोच, फ्रेटकार की हालत को मॉनिटर करने के लिए माउंटेड सेंसर का प्रयोग किया जाएगा। ट्रेनों की समयबद्धता ठीक करने वाली तकनीक पर भारतीय रेल्वेे कार्य कर रहा है, जिसके लिए वह यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम की सहायता लेने की तैयारी में है।

    रोलिंग स्टॉक (ट्रेनों के कोच) माउंटेड सेंसर लगाने की तकनीक से लैस करते हुए भारतीय रेलवे ऑन बोर्ड कंडीशन मॉनीटरिंग सिस्टम (ओबीसीएमएस) पर कार्य किया जा रहा है। इसका सबसे बड़ा फायदा यात्रियों को सुरक्षित सफर कराना तो होगा ही साथ ही समय पर कोच मेंटेंनेस का काम भी पूरा होता रहेगा। इसके प्रयोग से ट्रेनों में अचानक से होने वाली गड़बड़ी और इसके कारण ट्रेनों की बिगड़ने वाली समय-सारिणी पर अंकुश लगाया जा सकेगा। रेलवे के द्वारा ट्रेनों की ऑन बोर्ड कंडीशन मॉनीटरिंग करने हेतु विभिन्न कंपनियों से इस तकनीक को विकसित करने के लिए मंशा पत्र (एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट) की मांग की गई है।

    रेलवे द्वारा आधुनिक सिग्नलिंग प्रणाली पर भी काम किया जा रहा है, जिसके लिए यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम का सहारा लिया जाएगा। प्रयोगिक तौर पर इसके लिए 640 किलोमीटर ट्रेक पर परीक्षण भी किया जा चुका है। इस सिस्टम को स्वर्णिम चतुर्भुज और इसके सहायक ट्रैक पर लगाया जाएगा। इसके तहत झांसी-बीना, नागपुर-बडनेरा, येरागुंटल-रेणिगुंटा और विजयानगरम-पलासा रेलवे रूट को चुना गया है, जहां सबसे पहले इस सिग्नल प्रणाली का प्रयोग किया जाएगा। इस तकनीक के प्रयोग से ट्रेनों के समय-पालन व सुरक्षित सफर हेतु फायदा मिलेगा। रेलवे द्वारा इस पूरी परियोजना पर लगभग 1609 करोड़ रुपया खर्च किए जाऐंगे।


    Points to be Remember:-

    • तकनीक की सहायता से भारतीय रेल्वे के द्वारा ट्रेनों की समय-सारिणी सुधारने का कार्य, ट्रेन की ऑनलाइन मॉनीटरिंग की व्यरवस्था के अलावा यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम की सहायता से ट्रेनों को समय पर चलाने की व्यववस्था की जाएगी।
    • रेल्वें द्वारा अचानक से इंजन, कोच में खराबी को रोकने के उद्देश्य से ट्रेन का इंजन, कोच, फ्रेटकार की हालत को मॉनिटर करने के लिए माउंटेड सेंसर का प्रयोग किया जाएगा।

    Amar Singh Silawat

    Source:-Pib.nic.in


  • भारत द्वारा GSAT-7A उपग्रह का सफल प्रक्षेपण 
    2019-01-09


    /Bhaskarhindi.com/

    भारत द्वारा GSAT-7A उपग्रह का सफल प्रक्षेपण 


    20.12.2018

    भारतीय अनुसंधान संस्‍थान केन्‍द्र इसरो के द्वारा 19 दिसंबर 2018 को श्रीहरिकोटा के स्पेसपोर्ट से संचार उपग्रह GSAT-7A का सफल प्रक्षेपण किया गया। इस नवीन प्रक्षेपित उपग्रह के माध्यम से Q बैंड के उपभोक्ताओं के अलावा भारतीय वायु सेना के लिए संचार क्षमताएं मुहैया कराई जाऐंगी। एयरबेस तथा एयरबारन वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम भूमि पर मौजूद वायु सेना के रडार स्टेशनों से इस नए प्रक्षेपित उपग्रह के माध्यम से इंटरलिंकिंग-ई सुविधा प्राप्त करने में मदद की  संभावना व्‍यक्‍त की गई है। इस सुविधा के माध्यम से नेटवर्क आधारित युद्ध संबंधी क्षमता में विस्तार किया जा सकेगा। जिसका परिणाम यह होगा, कि भारतीय वायु सेना की ग्लोबल कार्यक्षेत्र में क्षमता में बढ़ौत्‍तरी होगी। इसरो के अनुसार यह एक अत्याधुनिक सेटेलाइट है, जिसका निर्माण भविष्य में पढ़ने वाली आवश्‍यकताओं को ध्‍यान में रखते हुए किया गया है। यह नवीन प्रक्षेपित उपग्रह देश के सबसे दूरदराज के क्षेत्रों में हाथ से पकड़े जाने वाले सभी प्रकार के उपकरणों से भी संपर्क स्थापित करने में सक्षम है।

    भारतीय अनुसंधान संस्‍थान केन्‍द्र इसरो के द्वारा यह एक बड़ी उपलब्धि हासिल की गई है। इससे पूर्व अमेरिका, रूस तथा चीन जैसे देशों के द्वारा अपनी सेना के लिए इस प्रकार के उपग्रह प्रक्षेपित किए जा चुके हैं। नवीन प्रक्षेपित उपग्रह में चार सोलर पैनल लगाए गए हैं, जो करीब 3.3 किलो वाट बिजली पैदा करने में सक्षम हैं तथा उपग्रह की आवश्‍यक्‍ता के आधार पर बिजली प्रदान करेंगे। इसके अलावा संचार उपग्रह में अपनी कक्षा में आगे पीछे या ऊपर नीचे जाने के लिए बाई- प्रोपेलेंट का केमिकल प्रोपल्शन सिस्टम की व्यवस्था की गई है। इस नवीन संचार उपग्रह का वजन 2250 किलोग्राम है, जिसे जीएसएलवी एफ 11 रॉकेट की सहायता से अंतरिक्ष में स्‍थापित किया गया है। इस नवीन संचार उपग्रह का निर्माण इसरो द्वारा 8 वर्षों तक सेवा प्रदान करने के उद्देश्‍य से तैयार किया गया है। भारतीय अनुसंधान संस्‍थान केन्‍द्र इसरो द्वारा इस नवीन संचार उपग्रह के निर्माण में लगभग 800 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं।


    Points to be Remember:-

    • भारतीय अनुसंधान संस्‍थान केन्‍द्र इसरो द्वारा 19 दिसंबर 2018 को श्रीहरिकोटा के स्पेसपोर्ट से संचार उपग्रह GSAT-7A का सफल प्रक्षेपण किया गया।
    • इस नवीन प्रक्षेपित उपग्रह के माध्यम से Q बैंड के उपभोक्ताओं के अलावा भारतीय वायु सेना के लिए संचार क्षमताएं मुहैया कराई जाऐंगी।
    • एयरबेस तथा एयरबारन वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम भूमि पर मौजूद वायु सेना के रडार स्टेशनों से इस नए प्रक्षेपित उपग्रह के माध्यम से इंटरलिंकिंग-ई सुविधा प्राप्त करने में मदद की संभावना व्‍यक्‍त की गई है।
    • यह नवीन प्रक्षेपित उपग्रह देश के सबसे दूरदराज के क्षेत्रों में हाथ से पकड़े जाने वाले सभी प्रकार के उपकरणों से भी संपर्क स्थापित करने में सक्षम है।
    • इससे पूर्व अमेरिका, रूस तथा चीन जैसे देशों के द्वारा अपनी सेना के लिए इस प्रकार के उपग्रह प्रक्षेपित किए जा चुके हैं।
    • इस नवीन संचार उपग्रह का वजन 2250 किलोग्राम है, जिसे जीएसएलवी एफ 11 रॉकेट की सहायता से अंतरिक्ष में स्‍थापित किया गया है।

    By-Amar singh Silawat


  • किसी व्यक्ति को अंतरिक्ष भेजने वाली कंपनी बनी वर्जिन गैलेक्टिक
    2018-12-26


    किसी व्यक्ति को अंतरिक्ष भेजने वाली कंपनी बनी वर्जिन गैलेक्टिक

    16 दिसंबर 2018

    14 साल पहले अस्तित्व में आई रिचर्ड्स ब्रेनसन की वर्जिन गैलेक्टिक कंपनी द्वारा बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए स्पेस टूरिज्म में कदम आगे बढ़ाते हुए वीएसएस यूनिटी यान का सफल परीक्षण किया गया। इस यान को कैलिफोर्निया में स्थित मोजावे से छोड़ा गया, जिसमें दो पायलट उपस्थित थे। अमेरिकी धरती से वर्ष 2011 के बाद पहली बार कोई अंतरिक्ष यान अंतरियक्ष यात्री को लेकर उड़ा है। इससे पहले अमेरिका द्वारा अपने अंतरिक्ष यात्रियों को रूस की सहायता से अंतरिक्ष में भेजा जाता था। अमेरिकी धरती से छोड़े गए इस अंतरिक्ष यान को स्पेस टूरिज्म के हिसाब से एक बड़ा कदम माना जा रहा है। स्पेस टूरिज्म की रेस में वर्जिन गैलेक्टिक कंपनी के द्वारा बाजी मार ली गई है। इस रेस में एलोन मस्क की टेस्ला, जेफ बेजोस की ब्लू, ओरिजन स्टॉप गोइंग कंपनियां आदि भी इस दौड़ में शामिल थीं। वर्जिन कंपनी के मालिक पेंशन के अनुसार दावा किया गया है कि लगभग 700 लोगों द्वारा 1.75 करोड रुपए तक के टिकट हेतु पैसे दिए जा चूके हैं।

    इससे पूर्व वर्ष 2014 में वर्जिन गैलेक्टिक कंपनी का अंतरिक्ष यान वीएसएस एंटरप्राइज टेस्ट फ्लाइट के दौरान दुर्घटना मैं नष्ट हो गया था। इस दुर्घटना में दो पायलटों में से एक की मृत्यु हो गई थी। इस परीक्षण के दौरान वीएसएससी यूनिटी को वाइट नाईट-2 नाम के विमान द्वारा 40000 फीट की ऊंचाई तक ले जाया गया। वीएसएससी यूनिटी विमान द्वारा धरती से लगभग 83 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुँचने में कामियाबी हासिल की गई। कंपनी के अनुसार स्पेस टूरिज्म की शुरुआत हो जाने के बाद वर्जिन गैलेक्टिक अपने विमान के माध्यम से लोगों को इसी ऊंचाई तक ले कर जाएगी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धरती से 100 किलोमीटर की ऊंचाई को अंतरिक्ष माना गया है, परंतु इसके उलट अमेरिकी एविएशन विभाग द्वारा धरती से 80 किलोमीटर से ज्यादा की ऊंचाई को अंतरिक्ष माना जाता है।


    Points to be Remember:-

    • 14 साल पहले अस्तित्व में आई रिचर्ड्स ब्रेनसन की वर्जिन गैलेक्टिक कंपनी द्वारा बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए स्पेस टूरिज्म में कदम आगे बढ़ाते हुए वीएसएस यूनिटी यान का सफल परीक्षण किया गया।
    • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धरती से 100 किलोमीटर की ऊंचाई को अंतरिक्ष माना गया है, परंतु इसके उलट अमेरिकी एविएशन विभाग द्वारा धरती से 80 किलोमीटर से ज्यादा की ऊंचाई को अंतरिक्ष माना जाता है।

    By-Amar Singh Silawat


  • 19 दिसंबर को (इसरो) द्वारा जीसैट-7ए संचार उपग्रह लॉंच किया जाएगा
    2018-12-18


    19 दिसंबर को (इसरो) द्वारा जीसैट-7ए संचार उपग्रह लॉंच किया जाएगा

    13.12.2018

    19 दिसंबर 2018 को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) द्वारा जीओसिंक्रोनस सैटेलाइट लांच व्हिकल जीएसएलवी-एफ11 की सहायता से जीसैट-7ए संचार उपग्रह की लॉंचिंग श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस स्‍टेशन से की जाएगी। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान इसरो द्वारा निर्मित 2,250 किग्रा वजनी जीसैट-7ए उपग्रह 35वां भारतीय संचार उपग्रह है। इसरो द्वारा इस संचार उपग्रह का जीवन काल आठ साल घोषित किया गया है। इसरो द्वारा इस उपग्रह को मानक आई-2000 किग्रा (आई-2के) बस का आकार प्रदान किया गया है। इस उपग्रह द्वारा भारतीय क्षेत्र में कु-बैंड पर संचार क्षमता उपलब्ध करवाई जाएगी। जीओसिंक्रोनस सैटेलाइट लांच व्हिकल जीएसएलवी-एफ11 अपनी 13वीं उड़ान के दौरान जीसैट-7ए संचार उपग्रह को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (जीटीओ) में स्‍थापित करेगा। जीओसिंक्रोनस सैटेलाइट लांच व्हिकल जीएसएलवी-एफ11 तीन चरणों के साथ इसरो के चौथे युग का लांच व्हिकल है। 

    Points to Remember:-

    • 19 दिसंबर 2018 को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) द्वारा जीओसिंक्रोनस सैटेलाइट लांच व्हिकल जीएसएलवी-एफ11 की सहायता से जीसैट-7ए संचार उपग्रह की लॉंचिंग श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस स्‍टेशन से की जाएगी।
    • भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) द्वारा निर्मित 2,250 किग्रा वजनी जीसैट-7ए उपग्रह 35वां भारतीय संचार उपग्रह है।
    • जीओसिंक्रोनस सैटेलाइट लांच व्हिकल जीएसएलवी-एफ11 तीन चरणों के साथ इसरो के चौथे युग का लांच व्हिकल है। 

    By-Amar Singh Silawat


  • पशुधन क्षेत्र के विकास हेतु ‘एंश्योर’ ऑनलाइन पोर्टल का शुभारंभ
    2018-12-18


    पशुधन क्षेत्र के विकास हेतु ‘एंश्योर’ ऑनलाइन पोर्टल का शुभारंभ

    12.12.18

    मोदी सरकार में केन्‍द्रीय कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्री राधामोहन सिंह द्वारा पशुधन क्षेत्र के सतत विकास के उद्देश्य से 11 दिसम्‍बर 2018 किो नई दिल्‍ली में डेयरी और मत्स्यपालन विभाग के अंतर्गत संचालित राष्‍ट्रीय पशुधन मिशन –ईडीईजी के इंश्‍योर पोर्टल का शुभारम्भ किया गया। इस मिशन के घटक-ईडीईजी के अंतर्गत कुक्‍कुट, लघु रूमीनेंट्स, सुअर, इत्यादि से संबंधित गतिविधियों के तहत  प्रदान की जाने वाली सब्सिडी डीबीटी के माध्यम से सीधे लाभार्थी के खाते में 30 दिनों के भीतर जमा की जाती है। नाबार्ड द्वारा डीबीटी के लिए लाभार्थियों की आसानी हेतु सुधार और पारदर्शिता लाने के लिए ‘इंश्‍योर’ नामक ऑनलाइन पोर्टल https://ensure. nabard.org का विकसित किया गया है। यहॉं लाभार्थियों को आवेदन की प्रक्रिया की सूचना आसानी से प्राप्‍त की जा सकेगी। नवीन प्रक्रिया के तहत बैंक का नियंत्रणाधिकारी/शाखा प्रबंधक, प्रस्‍ताव की जांच पड़ताल और अनुमोदन करेगा तथा इसके बाद ऑनलाइन पोर्टल में सब्सिडी का दावा अपलोड किया जाएगा। इसके परिणाम स्‍वरूप अनुमोदित सब्सिडी तथा ऋण अनुमोदन की तारीख से 30 दिनों के अंदर लाभार्थी के खाते में जमा की जाएगी। 

    Points to be remember:-

    • पशुधन क्षेत्र के सतत विकास के उद्देश्य से 11 दिसम्‍बर 2018 किो नई दिल्‍ली में डेयरी और मत्स्यपालन विभाग के अंतर्गत संचालित राष्‍ट्रीय पशुधन मिशन –ईडीईजी के इंश्‍योर पोर्टल का शुभारम्भ केन्‍द्रीय कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्री राधामोहन सिंह द्वारा किया गया।
    • नाबार्ड द्वारा डीबीटी के लिए लाभार्थियों की आसानी हेतु सुधार और पारदर्शिता लाने के लिए ‘इंश्‍योर’ नामक ऑनलाइन पोर्टल  https:// ensure. nabard.  org का विकसित किया गया है।

    By-Amar Singh Silawat


  • संसद के डिजिटल पुस्तकालय पोर्टल का विधिवत शुभारंभ
    2018-12-18


    संसद के डिजिटल पुस्तकालय पोर्टल का विधिवत शुभारंभ

    12.12.18

    1952 के बाद से लोकसभा में हुई चर्चाओं और विभिन्न संसदीय समितियों की रिपोर्ट समेत अनेक संसदीय दस्तावेज उपलब्ध कराने के उद्देश्‍य से 11 दिसम्‍बर 2018 को लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन द्वारा डिजिटल पुस्तकालय की वेबसाइट का विधिवत शुभारंभ किया गया। भारतीय संविधान सभा और केंद्रीय विधानसभा आदि की ऐतिहासिक चर्चाओं का भी इस पोर्टल पर संग्रह किया जाएगा। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन द्वारा डिजिटल पुस्तकालय की वेबसाइट का प्रयोग सर्च-इंजन के तौर भी किया जा सकेगा। यह ई-पार्लियामेंट की दिशा में उठाया गया एक कदम है।

    Points to be remember:-

    • 1952 के बाद से लोकसभा में हुई चर्चाओं और विभिन्न संसदीय समितियों की रिपोर्ट समेत अनेक संसदीय दस्तावेज उपलब्ध कराने के उद्देश्‍य से 11 दिसम्‍बर 2018 को लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन द्वारा डिजिटल पुस्तकालय की वेबसाइट का विधिवत शुभारंभ किया गया।

    By-Amar Singh Silawat


  • 'डीएसआरवी' को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया
    2018-12-18


    'डीएसआरवी' को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया

    12.12.18

    12 दिसम्‍बर 2018 को 666 मीटर तक सफलतापूर्वक नीचे जाकर गोता लगाते हुए एक बार में 14 लोगों की जान बचा सकने में सक्षम गहन जलमग्न बचाव वाहन (डीएसआरवी) को नौसेना के पश्चिमी कमांड में शामिल किया गया। इसके साथ ही भारतीय नौसेना द्वारा गहन जलमग्न बचाव वाहन (डीएसआरवी) की सहायता से हिंद महासागर में फंसी पनडुब्बियों के बचाव व राहत कार्य करने में आसानी से मदद प्राप्‍त होगी। अभिन्‍न पनडुब्‍बी बचाव क्षमता (डीएसआरवी) बचाव प्रणाली के साथ ही भारतीय नौसेना उन चुनिंदा नौसेना के समूह में शामिल हो गई है, जो एसी क्षमता से लैस हैं। इस बचाव प्रणाली की सहायता से हिन्‍द महासागर में भारतीय नौसेना की संकट में फंसी पनडुब्बियों के बचाव व राहत पहुँचाने के कार्य के अलावा भारतीय नौसेना द्वारा समुद्री इलाके की चौकसी के साथ नौसेना डाइविंग सपोर्ट ऑपरेशन के तहत समुद्र की सतह के नीचे निरीक्षण, परीक्षण तथा बचाव कार्य के हेतु गोताखोरों को लंबे समय तक समुद्र के भीतर रखने संबंधी कार्यों में भी मदद मिलेगी।

    Points to be remember:-

    • 666 मीटर तक सफलतापूर्वक नीचे जाकर एक गोते में 14 लोगों की जान बचा सकने वाला गहन जलमग्न बचाव वाहन (डीएसआरवी) 12 दिसम्‍बर 2018 को नौसेना के पश्चिमी कमांड में शामिल किया गया।
    • इसके साथ ही भाररतीय नौसेना द्वारा गहन जलमग्न बचाव वाहन (डीएसआरवी) की सहायता से हिंद महासागर में फंसी पनडुब्बियों के बचाव व राहत कार्य करने में आसानी से मदद प्राप्‍त होगी।

    By-Amar Singh Silawat


  • भारत द्वारा बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-5 का सफल परीक्षण 
    2018-12-13


    भारत द्वारा बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-5 का सफल परीक्षण 

    10.12.2018

    स्वदेश में ही विकसित सतह से सतह पर मार करने में सक्षम भारत द्वारा बैलिस्टिक अग्नि 5 मिसाइल का सफल परीक्षण ओडिसा के निकट डॉक्टर अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया। इस मिसाइल का यह 7वां सफल परीक्षण है। इस प्रकार की मिसाइल का विकास करने वाला अमेरिका, रूस, चीन और फ्रांस के बाद भारत दुनिया का 5वॉं देश बन गया है। अग्नि-5 मिसाइल 17.5 मीटर लम्‍बी, 2 मीटर चौड़ी और 50 टन वजनी  है। यह एक बार डेढ़ टन विस्‍फोटक पदार्थ ले जाने में सक्षम है। इसकी मारक क्षमता 5-8 हजार किमी है। जिसका सफल परीक्षण लगातार वर्ष 2012, 2013, 2015, 2016 तथा दो  परीक्षण 2018 में किया जा चुका है। इस मिसाइल को डीआरडीओ द्वारा विकसित किया गया है।

    Points to be Remember:- 

    • स्वदेश में ही विकसित सतह से सतह पर मार करने में सक्षम भारत द्वारा बैलिस्टिक अग्नि 5 मिसाइल का सफल परीक्षण ओडिसा के निकट डॉक्टर अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया।
    • इस मिसाइल का यह 7वां सफल परीक्षण है। इस प्रकार की मिसाइल का विकास करने वाला अमेरिका, रूस, चीन और फ्रांस के बाद भारत दुनिया का 5वॉं देश बन गया है।

    By-Amar Singh Silawat


  • डॉ. चीको असाकावा ने दृष्टिहीनों हेतु आवाज से चलने वाला ऐप बनाया
    2018-12-13


    डॉ. चीको असाकावा ने दृष्टिहीनों हेतु आवाज से चलने वाला ऐप बनाया

    09.12.2018

    30 साल से दृष्टिहीनों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तैयार करने में जुटे जापान के डॉ. चीको असाकावा द्वारा दृष्टिहीनों हेतु आवाज से चलने वाला ऐप का निमार्ण किया गया। उनके द्वारा 14 वर्ष पहले ही अपनी आंखों की रोशनी खो दी थी। इससे पूर्व उनके द्वारा आवाज से चलने वाला ऐप नेवकॉग का निमार्ण किया जा चुका है। इस एप के माध्यम से दृष्टिहीनों को इमारत के अंदर जगह ढूंढने में मदद मिलेगी। डॉ. चीको द्वारा दुनिया का पहला वेब टू स्पीच (इंटरनेट पर लिखा पढ़ने वाला) ब्राउजर भी बनाया जा चुका है।

    Points to be Remember:-

    • 30 साल से दृष्टिहीनों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तैयार करने में जुटे जापान के डॉ. चीको असाकावा द्वारा दृष्टिहीनों हेतु आवाज से चलने वाला ऐप का निमार्ण किया गया।

    By-Amar Singh Silawat


  • बिजली गिरने से 40 मिनट पहले अलर्ट करेगा एप
    2018-12-13


    बिजली गिरने से 40 मिनट पहले अलर्ट करेगा एप

    09.12.2018

    केंद्र सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेट्रोलॉजी (आईआईटीएम) द्वारा बिजली गिरने  से 30 से 40 मिनट पहले चेतावनी देने वाला एप विकसित किया गया। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेट्रोलॉजी (आईआईटीएम) द्वारा इस एप का नाम ‘दामिनी’ रखा गया है। यह एप बिजली गिरने की चेतावनी के अलावा इससे सुरक्षा के उपाय एवं प्राथमिक मेडिकल उपचार जैसी कई अन्‍य सुविधा भी प्रदान करेगा।

    Points to be Remember:-

    • केंद्र सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेट्रोलॉजी (आईआईटीएम) द्वारा बिजली गिरने  से 30 से 40 मिनट पहले चेतावनी देने वाला एप विकसित किया गया।

    By-Amar Singh Silawat


  • पहली इलेक्ट्रिक बोट का निमार्ण स्वीडिश कंपनी द्वारा किया गया
    2018-12-13


    पहली इलेक्ट्रिक बोट का निमार्ण स्वीडिश कंपनी द्वारा किया गया

    08.12.2018

    दुनिया की पहली इलेक्ट्रिक बोट 'कैंडेला 7' का निमार्ण स्वीडिश कंपनी कैंडेला स्पीडबोट एबी द्वारा किया गया। इलेक्ट्रिक बोट 'कैंडेला 7' की कीमत 2,45,00 डॉलर (करीब 1.73 करोड़ रुपए) रखी गई है। कंपनी की वेबसाइट से इसका प्री-ऑर्डर करने पर इसकी डिलिवरी 2019 में ही की जाएगी। इस बोट की लंबाई 25 फीट है, जिसमें एक बार में 5 लोग बैठ सकते हैं तथा यह 34mph की रफ्तार से चल सकती है। इस बोर्ट का निमार्ण कार्बन फाइबर से किया गया है। 44kWh की लिथियम-आयन बैटरी की सुविधा से लैस यह बोट फुल चार्ज होने में करीब 12 घंटे का समय लेकर एक बार में 50 समुद्री मील (58 मील) की दूरी तय करने में सझम है।

    Points to be Remember:-

    • दुनिया की पहली इलेक्ट्रिक बोट 'कैंडेला 7' का निमार्ण स्वीडिश कंपनी कैंडेला स्पीडबोट एबी द्वारा किया गया।
    • 44kWh की लिथियम-आयन बैटरी की सुविधा से लैस यह बोट फुल चार्ज होने में करीब 12 घंटे का समय लेकर एक बार में 50 समुद्री मील (58 मील) की दूरी तय करने में सझम है।

    By-Amar Singh Silawat


  • मंगल ग्रह पर रिकॉर्ड की गई हवाओं की आवाज
    2018-12-10


    मंगल ग्रह पर रिकॉर्ड की गई हवाओं की आवाज

    08.12.2018

    स्‍पेस एजेंसी द्वारा 10 वर्ष पूर्व लाल ग्रह पर भेजे गये नासा के रोवर ‘इनसाइट लैंडर’ ने 07 दिसम्‍बर 2018 को पहली बार मंगल ग्रह पर हवाओं की रिकार्डिंग जारी की गई है। नासा के अनुसार यह रिकॉर्डिंग उस वक्त की है जब मंगल पर 16 से 24 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हवाएं चल रही थीं।

    Points to be remember:-

    • स्‍पेस एजेंसी द्वारा 10 वर्ष पूर्व लाल ग्रह पर भेजे गये नासा के रोवर ‘इनसाइट लैंडर’ ने 07 दिसम्‍बर 2018 को पहली बार मंगल ग्रह पर हवाओं की रिकार्डिंग जारी की गई है।

    By-Amar Singh Silawat


  • बार-बार लिखा या मुद्रित किया जा सकने वाले कागज का विकास
    2018-12-09


    बार-बार लिखा या मुद्रित किया जा सकने वाले कागज का विकास

    08.12.2018

    चीन में फुजियान नॉर्मल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता द्वारा आसानी से बनाये जा सकने वाले बार-बार लिखा या मुद्रित किया जा सकने वाले कागज का विकास किया गया। सामान्य कागज एक बार ही प्रयोग किया जा सकता है तथा इससे कचरा तथा प्रदूषण फैलता है। इस कागज को तापमान में परिवर्तन कर आसानी से साफ किया जा सकता है। इस कागज पर लिखा या मुद्रित किया संदेश छह माह से भी अधिक समय तक दिख सकता है।

    Points to be remember:-

    • चीन में फुजियान नॉर्मल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता द्वारा आसानी से बनाये जा सकने वाले बार-बार लिखा या मुद्रित किया जा सकने वाले कागज का विकास किया गया।
    • इस कागज पर लिखा या मुद्रित किया संदेश छह माह से भी अधिक समय तक दिख सकता है।

    By-Amar Singh Silawat


  • चंद्रमा की दूसरी ओर की सतह पर चीन द्वारा रोवर को प्रक्षेपित किया गया
    2018-12-09


    चंद्रमा की दूसरी ओर की सतह चीन द्वारा रोवर को प्रक्षेपित किया गया

    08.12.2018

    चंद्रमा की दूसरी ओर की सतह यानि उसके विमुख फलक पर लैंड कराने चीन द्वारा रोवर को प्रक्षेपित किया गया। यह वैश्विक स्तर पर इस तरह का पहला प्रक्षेपण है। चीन द्वारा दक्षिण-पश्चिमी शिचांग के प्रक्षेपण केंद्र से लॉन्ग मार्च 3बी रॉकेट के जरिये ‘चांग‘ई-4’ नामक प्रक्षेपण किया गया। चीनी चंद्र अभियान ‘चांग‘ई-4’ का नामकरण चीनी पौराणिक कथाओं की चंद्रमा देवी के आधार पर किया गया है। चांग‘ई-4 के सफल प्रक्षेपण के माध्यम से चंद्रमा की दूसरी तरफ की सतह पर अज्ञात क्षेत्रों का पता लगाया जा सकेगा। पहली बार सोवियत संघ ने चंद्रमा की दूसरी तरफ की सतह की पहली तस्वीर वर्ष 1959 में ली जाकर चंद्रमा की "अंधेरे तरफ" के कुछ रहस्यों को सामने लाया गया था।

    Points to be remember:-

    • चंद्रमा की दूसरी ओर की सतह यानि उसके विमुख फलक पर लैंड कराने चीन द्वारा रोवर को प्रक्षेपित किया गया। यह वैश्विक स्तर पर इस तरह का पहला प्रक्षेपण है।
    • चीन द्वारा दक्षिण-पश्चिमी शिचांग के प्रक्षेपण केंद्र से लॉन्ग मार्च 3बी रॉकेट के जरिये ‘चांग‘ई-4’ नामक प्रक्षेपण किया गया।
    • चांग‘ई-4 के सफल प्रक्षेपण के माध्यम से चंद्रमा की दूसरी तरफ की सतह पर अज्ञात क्षेत्रों का पता लगाया जा सकेगा।

    By-Amar Singh Silawat


  • ‘OSIRIS-REx’ 3 दिसंबर 2018 को ‘बेनू’ क्षुद्रग्रह (एस्टेरॉयड) के नजदीक
    2018-12-08


    ‘OSIRIS-REx’ 3 दिसंबर 2018 को ‘बेनू’ क्षुद्रग्रह (एस्टेरॉयड) के नजदीक

    06.12.18

    सितम्बर 2016 में लॉन्च किये गए अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा का अंतरिक्ष यान ‘OSIRIS-REx’ 3 दिसंबर 2018 को ‘बेनू’ क्षुद्रग्रह (एस्टेरॉयड) के निकट पहुंचा। OSIRIS-REx’ मिशन में 150 सालों में पृथ्वी से टकराने की आशंका वाले विशाल उंचाई की इमारत के आकार वाले ‘बेनू’ क्षुद्रग्रह (एस्टेरॉयड) का करीबी से सर्वेक्षण इस मिशन में शामिल किया गया था।

    Points to be remember:-

    • सितम्बर 2016 में लॉन्च किया गया अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा का अंतरिक्ष यान ‘OSIRIS-REx’ 3 दिसंबर 2018 को ‘बेनू’ क्षुद्रग्रह (एस्टेरॉयड) के निकट पहुंचा।

    By-Amar Singh Silawat


  • भारतीय उपग्रह ‘जीएसएटी -11’ फ्रेंच गुयाना से लॉन्च किया गया
    2018-12-08


    भारतीय उपग्रह ‘जीएसएटी -11’ फ्रेंच गुयाना से लॉन्च किया गया

    05.12.18

    05 दिसम्बर 2018 को भारत में इंटरनेट की स्पीड बढ़ाने के उद्देश्य से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केन्द्र (इसरो) द्वारा फ्रेंच गुयाना से अब तक का सबसे भारी उच्च थ्रुपुट संचार उपग्रह ‘जीएसएटी -11’ लॉन्च किया गया। उपग्रह ‘जीएसएटी -11’ को ‘बिग बर्ड’ के नाम से भी जाना जाता है। ‘जीएसएटी -11’ को दक्षिण अमेरिका के फ्रेंच गुयाना स्पेस सेंटर से फ्रांस के एरियन - 5 वीए - 246 रॉकेट की मदद से लांच किया गया। 5,854 किलोग्राम वाला ‘जीएसएटी -11’ क्यू-बैंड में 32 उपयोगकर्ता बीम और का-बैंड में 8 हब बीम के माध्यम से उच्च डेटा दर कनेक्टिविटी प्रदान करने में सक्षम है। इस उपग्रह के साथ ही दक्षिण कोरिया के ‘जीईओे-कॉम्पकसेट – 2 ए’ भी लॉन्च किया गया।

    Points to be remember:-

    • 05 दिसम्बर 2018 को भारत में इंटरनेट की स्पीड़ को बढ़ाने के उद्देश्य से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केन्द्र (इसरो) द्वारा फ्रेंच गुयाना से अब तक का सबसे भारी उच्च थ्रुपुट संचार उपग्रह ‘जीएसएटी -11’ लॉन्च किया गया।
    • सबसे बड़ा होने के कारण ‘जीएसएटी -11’ को ‘बिग बर्ड’ के नाम से भी जाना जाता है।
    • इस उपग्रह के साथ ही दक्षिण कोरिया के ‘जीईओे-कॉम्पोसेट – 2 ए’ भी लॉन्च किया गया।

    By-Amar Singh Silawat


  • यूएई के वैज्ञानिकों द्वारा हवा से पानी सोखने वाला उपकरण विकसित
    2018-12-07


    यूएई के वैज्ञानिकों द्वारा हवा से पानी सोखने वाला उपकरण विकसित 

    04.12.18

    यूएई के वैज्ञानिकों द्वारा एक ऐसा उपकरण विकसित किया है, जो हवा से पानी को सोखने में सझम है। इस खोज से सुदूर बंजर इलाकों में पेयजल का नया सुरक्षित स्रोत प्रदान करने की संभावना बड़ गई है। वायुमंडल की हवा में आंकडों के आधार पर दुनियाभर में करीब 13 हजार अरब टन पानी है। सऊदी अरब की किंग अब्दुल्ला यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस ऐंड टेक्नॉलजी के अनुसंधानकर्ताओं ने इस उपकरण को विकसित किया है।

    Points to be remember:-

    • यूएई के वैज्ञानिकों द्वारा एक ऐसा उपकरण विकसित किया है, जो हवा से पानी को सोखने में सझम है।
    • सऊदी अरब की किंग अब्दुल्ला यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस ऐंड टेक्नॉलजी के अनुसंधानकर्ताओं ने इस उपकरण को विकसित किया है।
    • इस खोज से सुदूर बंजर इलाकों में पेयजल का नया सुरक्षित स्रोत प्रदान किया जा सकता है।

    By-Amar Singh Silawat


  • स्पेसएक्स द्वारा फाल्कन 9 रॉकेट से एक साथ 64 उपग्रह लांच किए
    2018-12-07


    स्पेसएक्स द्वारा फाल्कन 9 रॉकेट से एक साथ 64 उपग्रह लांच किए

    04.12.18

    4 दिसंबर 2018 को स्पेसएक्स द्वारा फाल्कन 9 रॉकेट की सहायता से एक साथ 64 उपग्रह प्रक्षेपित किए गए। अमेरिकी अरबपति एलन मस्क की कंपनी द्वारा उपग्रहों के प्रक्षेपण में सोमवार को तीसरी बार पुन: चक्रित (रीसाइकिल्ड) बूस्टर का इस्तेमाल करते हुए रॉकेट प्रक्षेपित किया गया। प्रक्षेपण के लिए एक ही रॉकेट का बार-बार इस्तेमाल करने की दिशा में मस्क की कंपनी द्वारा काम किया जा रहा है। अमेरिका के लिए यह नया रिकॉर्ड है।

    Points to be remember:-

    • 4 दिसंबर 2018 को स्पेस एक्स द्वारा फाल्कन 9 रॉकेट की सहायता से एक साथ 64 उपग्रह प्रक्षेपित किए गए।
    • प्रक्षेपण के लिए एक ही रॉकेट का बार-बार इस्तेमाल करने की दिशा में मस्क की कंपनी द्वारा काम किया जा रहा है।

    By-Amar Singh Silawat


  • ISS में प्रक्षेपण हेतु पहला मानवयुक्तर अंतरिक्ष मिशन तैयार
    2018-12-06


    ISS में प्रक्षेपण हेतु पहला मानवयुक्तर अंतरिक्ष मिशन तैयार

    03.12.18

    अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केन्द्र जाने वाला पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन 3 अंतरिक्ष यात्रियों के साथ 3 दिसंबर 2018 को पूर्वाह्न 11:31 बजे साढ़े छह महीने के मिशन पर सफलतापूर्वक रवाना। रूसी अंतरिक्ष एजेंसी के ओलेग कोनोनेंको सोयुज़ तथा नासा की ऐन मैकक्लेन, कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के डेविड सेंट-जैक्स द्वारा‍ MS -11 अंतरिक्ष यान पर प्रक्षेपण की तैयारी की गई।

    Points to be remember:-

    • अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केन्द्र जाने वाला पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन 3 अंतरिक्ष यात्रियों के साथ 3 दिसंबर 2018 को पूर्वाह्न 11:31 बजे साढ़े छ: महीने के मिशन पर सफलतापूर्वक रवाना।

    Amar Singh Silawat


  • दूसरी ‘तेजस’ सुपरफास्ट एक्सप्रेस ट्रेन के संचालन की तैयारी
    2018-12-06


    दूसरी ‘तेजस’ सुपरफास्ट एक्सप्रेस ट्रेन के संचालन की तैयारी

    01.12.18

    चेन्नई इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में निर्मित किये गए कोचों के साथ दूसरी ‘तेजस’ सुपरफास्ट एक्सप्रेस ट्रेन का संचालन चेन्नई और मदुरै के बीच किया जाएगा। वर्ष 2017 में मुंबई और गोवा के बीच पहली ‘तेजस’ ट्रेन का संचालन किया गया था। ‘तेजस’ सुपरफास्ट एक्सप्रेस ट्रेन के कोचों को आधुनिक मनोरंजन प्रणाली, मॉड्यूलर शौचालय, स्मार्ट खिड़कियों, और GPS आधारित यात्री सूचना प्रणाली आदि की सुविधा से लैस किया जाएगा।

    Points to be remember:-

    • चेन्नई इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में निर्मित किये गए कोचों के साथ दूसरी ‘तेजस’ सुपरफास्ट एक्सप्रेस ट्रेन का संचालन चेन्नई और मदुरै के बीच किया जाएगा।
    • वर्ष 2017 में मुंबई और गोवा के बीच पहली ‘तेजस’ ट्रेन का संचालन किया गया था।

    By-Amar Singh Silawat


  • वर्ष 2025 तक पानी के नीचे बुलेट ट्रेन चलाएगा चीन
    2018-12-04


    वर्ष 2025 तक पानी के नीचे बुलेट ट्रेन चलाएगा चीन

    30.11.18

    चीन सरकार द्वारा पानी के नीचे बुलेट ट्रेन चलाने के लिए प्रॉजेक्ट को मंजूरी के तहत प्रॉजेक्ट वर्ष 2025 तक पूरा किया जायेगा। यह परियोजना शंघाई के दक्षिण में स्थित तटीय शहर निनबो को जोशान से जोड़ेगी। 77 किलोमीटर लंबे इस रूट पर 16.2 किलोमीटर तक ट्रैक समुद्र के नीचे टनल बिछाया जाएगा। भारत में भी वर्ष 2022 तक मुंबई से अहमदाबाद के बीच पानी के नीचे से रूट बनाकर बुलेट ट्रेन चलने की परियोजना पर कार्य किया जा रहा है।

    Points to be remember:-

    • चीन सरकार द्वारा पानी के नीचे बुलेट ट्रेन चलाने के लिए प्रॉजेक्ट को मंजूरी के तहत प्रॉजेक्ट वर्ष 2025 तक पूरा किया जायेगा।
    • यह परियोजना शंघाई के दक्षिण में स्थित तटीय शहर निनबो को जोशान से जोड़ेगी।
    • भारत में भी वर्ष 2022 तक मुंबई से अहमदाबाद के बीच पानी के नीचे से रूट बनाकर बुलेट ट्रेन चलाने की परियोजना पर कार्य किया जा रहा है।

    By-Amar Singh Silawat


  • ISROद्वारा PSLV-C43 से लॉन्च किए 31 सैटेलाइट
    2018-12-04


    ISROद्वारा PSLV-C43 से लॉन्च किए 31 सैटेलाइट

    30.11.18

    भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा 29 नवम्बर 2018 को श्रीहरिकोटा से अपने पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हिकल (PSLV) C-43 द्वारा 31 सैटलाइटों को लॉन्च किये गए। पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हिकल (PSLV) C-43 को आन्ध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से 9 बजकर 58 मिनट में छोड़ा गया। इसमें भारत का हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग सैटलाइट (HySIS) और 8 देशों के अन्य 30 दूसरे सैटलाइट शामिल किये गए हैं। (ISRO) के अनुसार इस अभियान को पूरा होने में 112 मिनट का समय लगा।

    Points to be remember:-

    • भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा 29 नवम्बर 2018 को श्रीहरिकोटा से अपने पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हिकल (PSLV) C-43 द्वारा 31 सैटलाइटों को लॉन्च किये गए।
    • इसमें भारत का हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग सैटलाइट (HySIS) और 8 देशों के अन्य 30 दूसरे सैटलाइट शामिल किये गए हैं।

    By-Amar Singh Silawat


  • भारत का पहला उन्नत व्यक्तिगत रोबोट लॉन्च
    2018-12-04


    भारत का पहला उन्नत व्यक्तिगत रोबोट लॉन्च

    29.11.18

    बच्चों के लिए 27 नवंबर 2018 को भारत का पहला उन्नत व्यक्तिगत रोबोट ‘मिको 2’ लॉन्च किया गया। ‘इमोटिक्स’ नामक मुंबई स्थित स्टार्ट-अप द्वारा इसे रोबोट को विकसित किया गया है। यह रोबोट बच्चों की शुरुआती शिक्षा और विकास में माता-पिता की सहायता करेगा। इस रोबोट में पहले से ही प्रीलोडेड गेम्स, पहेलियों, रोचक तथ्यों, गीत, संगीत, नृत्य इत्यादि सामग्री लोड़ की गई है तथा इसमें नई सामग्री लोड करने की व्यवस्था है।

    Points to be remember:-

    • बच्चों के लिए 27 नवंबर 2018 को भारत का पहला उन्नत व्यक्तिगत रोबोट ‘मिको 2’ लॉन्च किया गया।
    • ‘इमोटिक्स’ नामक मुंबई स्थित स्टार्ट-अप द्वारा इसे रोबोठ को विकसित किया गया है।
    • यह रोबोट बच्चों की शुरुआती शिक्षा और विकास में माता-पिता की सहायता करेगा।

    By-Amar Singh Silawat


  • PSLV-C43 रॉकेट भारत के ‘HysIS’ उपग्रह को प्रक्षेपित करेगा
    2018-12-03


    PSLV-C43 रॉकेट भारत के ‘HysIS’ उपग्रह को प्रक्षेपित करेगा

    27.11.18

    ISRO द्वारा विकसित एक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह ‘HysIS’ 29 नवंबर 2018 को इसरो द्वारा ‘PSLV-C43’ मिशन से प्रक्षेपित किया जाएगा। PSLV-C43 रॉकेट भारत के ‘HysIS’ उपग्रह के साथ 30 अन्य उपग्रहों को अंतरिक्ष में स्थापित करेगा। ‘HysIS’ का मुख्य कार्य विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम के स्पष्ट इन्फ्रारेड और शॉर्टवेव इन्फ्रारेड क्षेत्रों में पृथ्वी की सतह का अध्ययन करना है।

    Points to be remember:-

    • ISRO द्वारा विकसित एक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह ‘HysIS’ 29 नवंबर 2018 को ‘PSLV-C43’ मिशन से प्रक्षेपित किया जाएगा।
    • ‘HysIS’ का मुख्य कार्य विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम के स्पष्ट इन्फ्रारेड और शॉर्टवेव इन्फ्रारेड क्षेत्रों में पृथ्वी की सतह का अध्ययन करना है।

    By-Amar Singh Silawat


  • गतिविधि रहित प्रोपेलर या जेट टरबाइन के साथ पहला विमान लॉन्च
    2018-12-02


    गतिविधि रहित प्रोपेलर या जेट टरबाइन के साथ पहला विमान लॉन्च

    24.11.18

    गतिविधि रहित प्रोपेलर या जेट टरबाइन के साथ पहले शांत हवाई जहाज का निर्माण मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के वैज्ञानिकों द्वारा तैयार कर उसमें उड़ान भरी गई। यह हवाई जहाज आयनिक पवन प्रौद्योगिकी द्वारा संचालित किया जाएगा। इस प्रौद्योगिकी में चार्ज आयनों को उत्पन्न करने के लिए आयनिक पवन एक शक्तिशाली विद्युत क्षेत्र का उपयोग करती है, जिसे संचालन के लिए विमान के पीछे से निष्कासित किया जाता है।

    Points to be remember:-

    • गतिविधि रहित प्रोपेलर या जेट टरबाइन के साथ पहले शांत हवाई जहाज का निर्माण मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के वैज्ञानिकों द्वारा तैयार कर उसमें उड़ान भरी गई।
    • यह हवाई जहाज आयनिक पवन प्रौद्योगिकी द्वारा संचालित किया जाएगा।

    By-Amar Singh Silawat


  • भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा नई तकनीक विकसित
    2018-12-02


    भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा नई तकनीक विकसित

    24.11.18

    ‘प्रभाव आधारित पूर्वानुमान दृष्टिकोण’ नामक नई तकनीक का विकास भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा किया गया है। इस नई तकनीक का प्रयोग बारिश से नदियों और जलाशयों में जल स्तर में होने वाली वृद्धि के आकलन हेतु किया जाएगा। यह नई तकनी‍क राज्य सरकारों को बारिश के प्रभाव की निगरानी करने और समयोचित निर्णय लेने में मदद करेगी।

    Points to be remember:-

    • ‘प्रभाव आधारित पूर्वानुमान दृष्टिकोण’ नामक नई तकनीक का विकास भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा किया गया है।
    • इस नई तकनीक का प्रयोग बारिश से नदियों और जलाशयों में जल स्तर में होने वाली वृद्धि के आकलन हेतु किया जाएगा।

    By-Amar Singh Silawat


  • मोरक्को के ‘मोहम्मद VI-B’ उपग्रह सफलतापूर्वक प्रक्षेपित
    2018-12-02


    मोरक्को के ‘मोहम्मद VI-B’ उपग्रह सफलतापूर्वक प्रक्षेपित

    23.11.2018

    फ्रांसीसी गुयाना में गुयाना स्पेस सेंटर से मोरक्को के उच्च रिसोल्यूशन वाला पृथ्वी-अवलोकन उपग्रह ‘मोहम्मद VI-B’ उपग्रह को 21 नवंबर 2018 को एरियानेस स्पेस द्वारा सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया। यह उपग्रह मैपिंग और भूमि सर्वेक्षण, क्षेत्रीय विकास, कृषि निगरानी, रोकथाम और प्राकृतिक आपदाओं के प्रबंधन, और खदान अन्वेषण आदि कार्यों में उपयोग किया जाएगा।

    Points to be remember:-

    • फ्रांसीसी गुयाना में गुयाना स्पेस सेंटर से मोरक्को के उच्च रिसोल्यूशन वाला पृथ्वी-अवलोकन उपग्रह ‘मोहम्मद VI-B’ उपग्रह को 21 नवंबर 2018 को एरियानेस स्पेस द्वारा सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया।

    By-Amar Singh Silawat


  • सींग वाले मेंढकों की चार नई प्रजातियों की खोजे
    2018-12-02


    सींग वाले मेंढकों की चार नई प्रजातियों की खोजे

    22.11.2018

    दिल्ली विश्वविद्यालय, यूनिवर्सिटी कॉलेज डबलिन और राष्ट्रीय संग्रहालय (UK) के जीव विज्ञानियों की टीम द्वारा पूर्वोत्तर भारत के हिमालयी क्षेत्रों में सींग वाले मेंढकों की चार नई प्रजातियां खोजी गई। ये चारों नई भारतीय प्रजातियां हिमालयन हॉर्न्ड फ्रॉग; गारो वाइट-लिप्ड हॉर्न्ड फ्रॉग; येलो स्पॉटेड वाइट-लिप्ड हॉर्न्ड फ्रॉग; और जायंट हिमालयन हॉर्न्ड फ्रॉग हैं।

    Points to be Remember:-

    • दिल्ली विश्वविद्यालय, यूनिवर्सिटी कॉलेज डबलिन और राष्ट्रीय संग्रहालय (UK) के जीव विज्ञानियों की टीम द्वारा पूर्वोत्तर भारत के हिमालयी क्षेत्रों में सींग वाले मेंढकों की चार नई प्रजातियां खोजी गई।

    By-Amar Singh Silawat


  • किलोग्राम की परिभाषा बदली
    2018-11-24


    किलोग्राम की परिभाषा बदली

    19.11.2018

    पैरिस में हुई दुनिया भर के वैज्ञानिकों की मीटिंग में एकमत से फैसला कर विश्व की मानक परिभाषा के तहत किलोग्राम की परिभाषा बदल दी गई है। किलोग्राम की पूर्व परिभाषा अंतर्राष्ट्रीय किलोग्राम (IPK) के अंतर्राष्ट्रीय प्रोटोटाइप पर आधारित है, जो फ्रांस में इंटरनैशनल वेट्स एंड मीज़र्स ब्यूरो (BIPM) में संग्रहीत प्लैटिनम मिश्र धातु का एक सिलेंडर है। प्लैंक स्थिरांक द्वारा किलोग्राम की नई परिभाषा को प्रतिस्थापित किया जाएगा। नई परिभाषा के लिए वजन मापने का काम किब्बल नाम का एक तराजू करेगा। अब इसका आधार प्लेटिनम इरीडियम का सिलिंडर नहीं होगा।

    Points to be Remember:-

    • पैरिस में हुई दुनिया भर के वैज्ञानिकों की मीटिंग में एकमत से फैसला कर विश्व की मानक परिभाषा के तहत किलोग्राम की परिभाषा बदल दी गई है।
    • प्लैंक स्थिरांक द्वारा किलोग्राम की नई परिभाषा को प्रतिस्थापित किया जाएगा। नई परिभाषा के लिए वजन मापने का काम किब्बल नाम का एक तराजू करेगा।

    By-Amar Singh Silawat


    Source:-      

    https://www.financialexpress.com/hindi/international-news/definition-of-kilogram-changed-after-130-years/1385664/


  • नया ओपन ऑनलाइन शिक्षण कार्यक्रम शुरू
    2018-11-23


    नया ओपन ऑनलाइन शिक्षण कार्यक्रम शुरू

    19.11.2018

    इंफ्रास्ट्रक्चर एंड टेक्नोलॉजी फॉर एजुकेशन (KITE) केरल द्वारा ‘KOOL’ नामक ऑनलाइन ओपन लर्निंग ट्रेनिंग प्लेटफार्म लॉन्च किया किया गया। इसका प्रयोग आम जनता को प्रशिक्षित करने के अलावा शिक्षकों तथा छात्रों द्वारा किया जा सकेगा। ‘KOOL’ नामक ऑनलाइन ओपन लर्निंग ट्रेनिंग प्लेटफार्म को एक MOOC (मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्स) मॉडल में डिजाइन किया गया है। इसमें एनिमेटेड प्रशिक्षण सहायक और वीडियो ट्यूटोरियल के रूप में शिक्षार्थियों के लिए विशेषताओं की एक श्रृंखला की व्यवस्था की गयी है।

    Points to be Remember:-

    • इंफ्रास्ट्रक्चर एंड टेक्नोलॉजी फॉर एजुकेशन (KITE) केरल द्वारा ‘KOOL’ नामक ऑनलाइन ओपन लर्निंग ट्रेनिंग प्लेटफार्म लॉन्च किया किया गया।
    • इसमें एनिमेटेड प्रशिक्षण सहायक और वीडियो ट्यूटोरियल के रूप में शिक्षार्थियों के लिए विशेषताओं की एक श्रृंखला की व्यवस्था की गयी है।

    By-Amar Singh Silawat


    Source:-      

    https://www.ndtv.com/education/kerala-government-s-kite-introduces-new-kool-open-online-learning-programme-1949302


  • गुजरात के कच्छ में मानव पूर्वज जीवाश्म की खोज
    2018-11-20


    गुजरात के कच्छ में मानव पूर्वज जीवाश्म की खोज

    17.11.2018

    गुजरात के कच्छ में वैज्ञानिकों द्वारा 1 करोड़ 10 लाख साल पुराना मानव पूर्वजों के जीवाश्म के तहत ऊपरी जबड़े की खोज की गयी है। इस खोज से भारतीय प्रायद्वीप में प्राचीन महाकपि की मौजूदगी की पुष्टि होती है। कपि या होमोनोइड्स, दक्षिणपूर्व एशिया और अफ्रीका से आयी नरवानर की प्रजाति है जिसमें गिब्बन और महावानर: चिम्प, ऑरंगुटान, गोरिल्ला, और मानव शामिल हैं। यूपी के लखनऊ में बीरबल साहनी पुराविज्ञान इंस्टिट्यूट के शोधकर्ताओं ने खनन में मिले इस मानव जबड़े का अध्ययन किया।

    Points to be Remember:-

    • गुजरात के कच्छ में वैज्ञानिकों द्वारा 1 करोड़ 10 लाख साल पुराना मानव पूर्वजों के जीवाश्म के तहत ऊपरी जबड़े की खोज की गई।
    • इस खोज से भारतीय प्रायद्वीप में प्राचीन महाकपि की मौजूदगी की पुष्टि होती है।

    By-Amar Singh Silawat


    Source:-

    https://navbharattimes.indiatimes.com/state/gujarat/other-cities/scientists-found-11-million-old-human-fossils-in-kutch-gujarat/articleshow/66690150.cms


  • चीन द्वारा 'कृत्रिम सूरज’ का निर्माण किया
    2018-11-20


    चीन द्वारा 'कृत्रिम सूरज’ का निर्माण किया

    16.11.2018

    चीन के वैज्ञानिकों द्वारा ‘कृत्रिम सूर्य’ का निर्माण किया गया, जो असली सूरज की कोर से भी 3 गुना ज्यादा गर्म होने में सक्षम है। इस निर्माण का मुख्या उद्देश्य ईंधन की कमी दूर करना है। इसका निर्माण इंस्टिट्यूट ऑफ फिजिकल साइंस, चीन के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया है। इस आर्टिफिशियल सूर्य में हाइड्रोजन गैस को 5 करोड़ डिग्री सेल्सियस तापमान पर गर्म करते हुए इसी तापमान पर 102 सेकंड तक स्थिर रखा गया है। 'कृत्रिम सूरज’ में गैस द्वारा उत्पन्न की गई नाभिकीय ऊर्जा को विशेष तकनीक के माध्यम से इकोफ्रेंडली सुरक्षित ग्रीन ऊर्जा में बदला जा सकता है। इसके उपयोग से जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता काफी हद तक कम काम होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। ‘एक्स्पेरिमेंटल एडवांस्ड सुपरकंडक्टिंग टोकमाक’ (EAST) नामक रिएक्टर को सूर्य की प्रक्रियाओं को दोहराने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

    Points to be Remember:-

    • चीन के वैज्ञानिकों द्वारा ‘कृत्रिम सूर्य’ का निर्माण किया गया, जो असली सूरज की कोर से भी 3 गुना ज्यादा गर्म होने में सक्षम है।
    • इसका निर्माण इंस्टिट्यूट ऑफ फिजिकल साइंस, चीन के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया है।
    • 'कृत्रिम सूरज’ में गैस द्वारा उत्पन्न नाभिकीय ऊर्जा को विशेष तकनीक के माध्यम से इकोफ्रेंडली सुरक्षित ग्रीन ऊर्जा में बदला जा सकता है।
    • ‘एक्स्पेरिमेंटल एडवांस्ड सुपरकंडक्टिंग टोकमाक’ (EAST) नामक रिएक्टर को सूर्य की प्रक्रियाओं को दोहराने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

    By-Amar Singh Silawat


    Source:-       www.patrika.com


  • वैज्ञानिकों द्वारा खोजा गया: ‘सुपर-अर्थ’
    2018-11-20


    वैज्ञानिकों द्वारा खोजा गया: सुपर-अर्थ

    15.11.2018

    पृथ्वी पर दूसरी सबसे नज़दीकी सितारा प्रणाली रेड ड्वार्फ बर्नार्ड के चारों ओर एक ठंडे ‘सुपर-अर्थ’ एक्सोप्लैनेट की खोज वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम द्वारा की गयी है। इस खोज किये गए ‘सुपर-अर्थ’ का नाम ‘बर्नार्ड्स स्टार B’ (या GJ 699 b) रखा गया है। वह अपने मेजबान तारे का 233 दिनों में चक्कर लगाता है तथा पृथ्वी से छह प्रकाश-वर्ष दूरी पर है। इस ग्रह की सतह का तापमान शून्य से करीब 170 डिग्री सेल्सियस नीचे है।

    Points to be Remember:-

    • पृथ्वी पर दूसरी सबसे नज़दीकी सितारा प्रणाली रेड ड्वार्फ बर्नार्ड के चारों ओर एक ठंडे सुपर-अर्थएक्सोप्लैनेट की खोज वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम द्वारा की गयी है।
    • इस खोज किये गए सुपर-अर्थका नाम बर्नार्ड्स स्टार B’ (या GJ 699 b) रखा गया है।
    • वह अपने मेजबान तारे का 233 दिनों में चक्कर लगाता है तथा पृथ्वी से छह प्रकाश-वर्ष दूरी पर है।

    By-Amar Singh Silawat


    Source:-  

    https://www.punjabkesari.in/international/news/super-earth-circling-the-nearest-single-star-of-the-sun-904729


  • इमली से चिकनगुनिया का इलाज संभव हुआ
    2018-11-20


    इमली से चिकनगुनिया का इलाज संभव हुआ

    13.11.2018

    आईआईटी रुड़की के प्रफेशरों द्वारा इमली के बीजों में पाई जाने विषाणु रोधी गुण वाली लैक्टिन प्रोटीन की खोज की गई है, जिसके इस्तेमाल से चिकनगुनिया के उपचार हेतु दवाई निमार्ण हेतु किये जाने दावा किया गया है। खोज में शामिल दोनों प्रोफेशरों द्वारा विषाणुरोधी प्रोटीन लेक्टिन वाले एंटीवायरल कम्पोजीशन के पेटेंट हेतु आवेदन किया गया है। अब उनका लक्ष्‍य चिकनगुनिया के इजाज हेतु औषधि तैयार करना है। इस पूरी रिसर्च में पाया गया है, कि इमली बीज से प्राप्‍त लैक्टिन ग्लाइकेन्स एसिटिलग्लूकोसामीन (एनएजी) वाले शुगर मॉलिक्यूल्स से मिलकर मूल कोशिकाओं में जीवाणुओं को अन्‍दर जाने से रोक देता है।

    Points to be Remember:-

    • आईआईटी रुड़की के प्रफेशरों द्वारा इमली के बीजों में पाई जाने विषाणु रोधी गुण वाली लैक्टिन प्रोटीन की खोज की गई है, जिसके इस्तेमाल से चिकनगुनिया के उपचार हेतु दवाई निमार्ण हेतु किये जाने दावा किया गया है।
    • इस पूरी रिसर्च में पाया गया है, कि इमली बीज से प्राप्‍त लैक्टिन ग्लाइकेन्स एसिटिलग्लूकोसामीन (एनएजी) वाले शुगर मॉलिक्यूल्स से मिलकर मूल कोशिकाओं में जीवाणुओं को अन्‍दर जाने से रोक देता है।

    By-Amar Singh Silawat


    Source:-        

    https://www.amarujala.com/india-news/now-chikungunya-treatment-can-be-done-from-tamarind


  • GSAT-29 का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण
    2018-11-20


    GSAT-29 का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण

    14.11.2018

    भारतीय अं‍तरिक्ष अनुसंधान केन्‍द्र (इसरो) द्वारा श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से अब तक का सबसे वजनी (3423 किलोग्राम) भारतीय सैटलाइट GSAT-29 का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया गया। इस वर्ष इसरो द्वारा लॉंच यह पांचवां सैटलाइट है, जिसे भू स्थिर कक्षा में स्थापित किया जाएगा। दुनिया के दूसरे सबसे बड़े बूस्टर S200 युक्‍त 640 टन वजनी रॉकेट जीएसएलवी माक-3 की मदद से 3423 किलोग्राम वजनी रॉकेट का प्रक्षेपण किया गया। डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत जम्मू और कश्मीर के साथ उत्तर-पूर्वी राज्यों को बेहतर हाईस्पीड इंटरनेट सेवा मुहैया कराने हेतु इसमें ऑपरेशनल पेलोड्स लगाये गये हैं। इसके अलावा इस सैटलाइट में तीन प्रदर्शन प्रौद्योगिकियों, क्यू ऐंड वी बैंड्स, ऑप्टिकल कम्युनिकेशन और एक हाई रेजॉल्यूशन कैमरा भी लगाये गये हैं।

    Points to be Remember:-

    • भारतीय अं‍तरिक्ष अनुसंधान केन्‍द्र (इसरो) द्वारा श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से अब तक का सबसे वजनी (3423 किलोग्राम) भारतीय सैटलाइट GSAT-29 का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया गया।
    • दुनिया के दूसरे सबसे बड़े बूस्टर S200 युक्‍त 640 टन वजनी रॉकेट जीएसएलवी माक-3 की मदद से 3423 किलोग्राम वजनी रॉकेट का प्रक्षेपण किया गया।

    By-Amar Singh Silawat


    Source:-        http://ddnews.gov.in


     

  • सबसे बड़ा मस्तिष्क जैसा सुपरकंप्यूटर चालू किया गया
    2018-11-16


    सबसे बड़ा मस्तिष्क जैसा सुपरकंप्यूटर चालू किया गया

    13.11.2018

    मानव मस्तिष्क की तरह काम करने के लिए डिज़ाइन किये गए दूनिया के सबसे बड़े सुपर कंप्‍यूटर को चालू किया गया। इस सुपर कंप्‍यूटर को ‘स्पाइकिंग न्यूरल नेटवर्क आर्किटेक्चर’ (स्पिननेकर) मशीन नाम दिया गया है। इसकी कार्य करने की क्षमता प्रति सेकंड 200 मिलियन से अधिक कार्यों को पूरा करने की क्षमता है। इस मशीन को मैनचेस्टर विश्वविद्यालय, यूनाइटेड किंगडम द्वारा डिजाइन किया गया है।

    Points to be Remember:-

    • मानव मस्तिष्क की तरह काम करने के लिए डिज़ाइन किये गए दूनिया के सबसे बड़े सुपर कंप्‍यूटर को चालू किया गया।
    • प्रति सेकंड 200 मिलियन से अधिक कार्यों को पूरा करने की क्षमता वाले इस सुपर कंप्‍यूटर को ‘स्पाइकिंग न्यूरल नेटवर्क आर्किटेक्चर’ (स्पिननेकर) मशीन नाम दिया गया है।
    • इसे मैनचेस्टर विश्वविद्यालय, यूनाइटेड किंगडम द्वारा डिजाइन किया गया है।

    By-Amar Singh Silawat


  • गगनयान मिशन से पूर्व ISRO 10 प्रयोगों के पूल को खोज रहा
    2018-11-16


    गगनयान मिशन से पूर्व ISRO 10 प्रयोगों के पूल को खोज रहा

    12.11.2018

    ISRO द्वारा गगनयान मिशन से पहले किए जाने वाले प्रयोगों की एक सूची तैयार की जा रही है। जिनका आयोजन पृथ्वी की निचली कक्षा में किया जाएगा। ISRO पृथ्वी की इसी निचली कक्षा में अंतरिक्ष यात्री भेजने की तैयारी कर रहा है। इन 10 प्रयोगों के पूल के तहत ISRO द्वारा जैविक वायु फिल्टर और बायोसेंसरों जैसे सूक्ष्म जैविक प्रयोगों हेतु चिकित्सा उपकरणों का परीक्षण शामिल किया जा सकता है।

    Points to be Remember:-

    • ISRO द्वारा गगनयान मिशन से पहले किए जाने वाले प्रयोगों की एक सूची तैयार की जा रही है। जिनका आयोजन पृथ्वी की निचली कक्षा में किया जाएगा।

    By-Amar Singh Silawat


     

  • विदेशी प्रयोग हेतु ISRO  ने अनाउन्स्मेंट ऑफ़ ओपोर्च्युनिटी (AO) जारी किया
    2018-11-16


    विदेशी प्रयोग हेतु ISRO  ने अनाउन्स्मेंट ऑफ़ ओपोर्च्युनिटी (AO) जारी किया

    12.11.2018

    वर्ष 2023 के मध्य तक योजनाबद्ध तरीके से वीनस ग्रह के मिशन की दिशा में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा अपना पहला कदम उठाया जाएगा। इस मिशन हेतु वैज्ञानिक पेलोड का प्रस्ताव देने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष समुदाय को अनाउन्स्मेंट ऑफ़ ओपोर्च्युनिटी (AO) जारी किया गया है। इस AO को विभिन्न अंतरिक्ष एजेंसियों के अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों के लिए खेला गया है, जिससे वीनस का अध्ययन करने के लिए अंतरिक्ष-आधारित प्रयोग किये जा सकें।

    Points to be Remember:-

    • वर्ष 2023 के मध्य तक योजनाबद्ध तरीके से वीनस ग्रह के मिशन की दिशा में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा अपना पहला कदम उठाया जाएगा।
    • इस मिशन हेतु वैज्ञानिक पेलोड का प्रस्ताव देने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष समुदाय को अनाउन्स्मेंट ऑफ़ ओपोर्च्युनिटी (AO) जारी किया गया है।

    By-Amar Singh Silawat


     

  • NASA द्वारा विशाल नए अंटार्कटिक हिमनद को खोजा गया
    2018-11-16


    NASA द्वारा विशाल नए अंटार्कटिक हिमनद को खोजा गया

    12.11.2018

    NASA द्वारा ऑपरेशन आइस ब्रिज उड़ान के तहत हिमनदों का सर्वेक्षण करने के मिशन के दौरान विशाल नए अंटार्कटिक हिमनद (B-46 नामक हिमनद) को खोजा गया। यह हिमनद अक्टूबर 2018 में पाइन आइलैंड ग्लेशियर से टूटा हुआ भाग है। US नेशनल आइस सेंटर का अनुमान के अनुसार B-46 नामक हिमनद का अनुमानित आकार आकार 66 वर्ग समुद्री मील (87 वर्ग मील) बताई गई है।

    Points to be Remember:-

    • NASA द्वारा ऑपरेशन आइस ब्रिज उड़ान के तहत हिमनदों का सर्वेक्षण करने के मिशन के दौरान विशाल नए अंटार्कटिक हिमनद (B-46 नामक हिमनद) को खोजा गया।

    By-Amar Singh Silawat


     

  • खगोलविदों द्वारा खोजे गए दो नए ग्रह
    2018-11-16


    खगोलविदों द्वारा खोजे गए दो नए ग्रह

    12.11.2018

    खगोलविदों द्वारा गैलेक्टिक बल्ज और डिस्क नामक क्षेत्रों में दो नए ग्रहों की खेज की गई जो किसी सितारे की कक्षा में परिक्रमा नहीं करते हैं। इन ग्रहों का आकार निर्धारित करना मुश्किल है, क्‍योंकि ये ग्रह सितारों की कक्षा में परिक्रमा नहीं करते बल्कि ‘फ़्री-फ़्लोटिंग’ रहते  हैं। इन दोनों खोजे गए नए गृहों में से एक का आकार में पृथ्वी के समान तथा दूसरे का आकार बृहस्पति के समान होने की सम्‍भावना व्‍यक्‍त की गई है।

    Points to be Remember:-

    • खगोलविदों द्वारा गैलेक्टिक बल्ज और डिस्क नामक क्षेत्रों में दो नए ग्रहों की खेज की गई जो किसी सितारे की कक्षा में परिक्रमा नहीं करते हैं।

    By-Amar Singh Silawat


     

  • नासा (ISS) में टिश्यू चिप्स या ऑर्गन-ऑन-चिप्स भेजेगा
    2018-11-15


    नासा (ISS) में टिश्यू चिप्स या ऑर्गन-ऑन-चिप्स भेजेगा

    11.11.2018

    वैज्ञानिकों द्वारा 3D मैट्रिक्स में मानव कोशिकाओं से तैयार किये गए छोटे उपकरणों को टिश्यू चिप्स या ऑर्गन-ऑन-चिप्स के रूप में पहचाना जाता है। ये बेहद लचीली प्लास्टिक से बनी होती हैं। टिश्यू चिप्स के अंदर कोशिकाओं को पोषक तत्व और ऑक्सीजन प्रदान करने के लिए पोर्ट और चैनल होते हैं। नासा द्वारा कोशिकाओं में तनाव, दवाओं और अनुवांशिक परिवर्तनों का सामना करने की प्रक्रिया आदि की जानकारी प्राप्‍त करने हेतु अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर इन टिश्यू चिप्स या ऑर्गन-ऑन-चिप्स को भेजने की तैयारी कर रहा है।

    Points to be Remember:-

    • वैज्ञानिकों द्वारा 3D मैट्रिक्स में मानव कोशिकाओं से तैयार किये गए छोटे उपकरणों को टिश्यू चिप्स या ऑर्गन-ऑन-चिप्स के रूप में पहचाना जाता है।
    • नासा द्वारा कोशिकाओं में तनाव, दवाओं और अनुवांशिक परिवर्तनों का सामना करने की प्रक्रिया आदि की जानकारी प्राप्‍त करने हेतु अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर टिश्यू चिप्स को भेजने की तैयारी की गई।

    By-Amar Singh Silawat


     

  • चीन ने बनाई समुद्र के नीचे दुनिया की सबसे बड़ी सुरंग
    2018-11-13


    चीन ने बनाई समुद्र के नीचे दुनिया की सबसे बड़ी सुरंग

    09.11.2018

    चीन द्वारा इंजीनियरिंग का बेमिसाल नमूना पेश करते हुए दुनिया की सबसे गहरी सुरंग (8.1km लंबाई) का निर्माण करने में सफलता हासिल की है। इस 8.1 किलोमीटर लंबाई में 3.49 किलोमीटर हिस्सा समुद्र के नीचे बनाया गया है। यह 88 मीटर गहरी सुरंग क्विंगदाओ शहर के जियोझाऊ खाड़ी में बनाई गई है। यह परियोजना चीन में निर्माणाधीन क्विंगदाओ के 1 नंबर मेट्रो लाइन का हिस्सा है।

    Points to be Remember:-

    • चीन द्वारा इंजीनियरिंग का बेमिसाल नमूना पेश करते हुए दुनिया की सबसे गहरी सुरंग (8.1km लंबाई) का निर्माण करने में सफलता हासिल की है।

    By-Amar Singh Silawat


     

  • इसरो द्वारा शुक्र  पर यान भेजने की तैयारी
    2018-11-13

    इसरो द्वारा शुक्र  पर यान भेजने की तैयारी


    09.11.2018

    भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो कामयाबी की नई इबारत लिखते हुए वर्ष 2023 के मध्य तक शुक्र ग्रह पर अंतरिक्ष यान भेजने की तैयारी कर रहा है। अंतरिक्ष के इस मिशन में सेटेलाइट पर थर्मल कैमरा, मास स्पेक्ट्रोमीटर तथा क्लाउड मॉनिटरिंग कैमरा, आदि के साथ 12 वैज्ञानिक पेलोड भेजे जाएंगे। इस मिशन के तहत शुक्र ग्रह पर सतह और उप-सतह, वायुमंडलीय रसायन शास्त्र तथा सौर विकरण या सौर हवाओं के अध्ययन पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इस मिशन हेतु 500 वाट पावर से लैस 175 किलोग्राम वजनी सेटेलाइट को भेजा जाएगा। इससे पूर्व 1960 में सोवियत संघ के वेनेरा मिशन द्वारा शुक्र (Venus) ग्रह की खोज हेतु शुरुआत की गई थी।

    Points to be Remember:-

    • भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो कामयाबी की नई इबारत लिखते हुए वर्ष 2023 के मध्य तक शुक्र ग्रह पर अंतरिक्ष यान भेजने की तैयारी कर रहा है।
    • इस मिशन हेतु 500 वाट पावर से लैस 175 किलोग्राम वजनी सेटेलाइट को भेजा जाएगा।

    By-Amar Singh Silawat

     

  • ट्रोजन के अध्ययन हेतु मिशन 2021 में लॉन्च होगा
    2018-11-13


    ट्रोजन के अध्ययन हेतु मिशन 2021 में लॉन्च होगा

    08.11.2018

    प्लूटो तक यात्रा करने वाले नाशा द्वारा तैयार अंतरिक्ष उपकरण राल्फ तथा मिशन पेलोड लुसी बृहस्पति के ट्रोजन क्षुद्रग्रहों का पता लगाने के लिए तैयार किये गए। इस मिशन के तहत लुसी अंतरिक्ष यान राल्फ के लगभग जुड़वां एल राल्फ को ले जाएगा, जो बृहस्पति के ट्रोजन क्षुद्रग्रहों के बारे में जांच करते हुए उनके बारे में पता लगाएगा। बृहस्पति के ट्रोजन का अध्ययन करने वाला पहला अंतरिक्ष मिशन 2021 में लॉन्च किया जाएगा।

    Points to be Remember:-

    • प्लूटो तक यात्रा करने वाले नाशा द्वारा तैयार अंतरिक्ष उपकरण राल्फ तथा मिशन पेलोड लुसी बृहस्पति के ट्रोजन क्षुद्रग्रहों का पता लगाने के लिए तैयार किये गए।
    • बृहस्पति के ट्रोजन का अध्ययन करने वाला पहला अंतरिक्ष मिशन 2021 में लॉन्च किया जाएगा।

    By-Amar Singh Silawat


     

  • चीन निर्मित उन्नत स्टेल्थ ड्रोन का अनावरण
    2018-11-10


    चीन निर्मित उन्नत स्टेल्थ ड्रोन का अनावरण

    08.11.2018

    चीन के  गुआंग्‍डोंग प्रांत झुआई में आयोजित चीनी एयर शो, 2018 में चीन  में निर्मित अगली पीढ़ी के स्टेल्‍थ मानव रहित हवाई वाहन (यूएवी CH-7) का अनावरण किया गया। इस यूएवी का निर्माण चीन द्वारा दूसरे देशों के उन्नत प्रवेश क्षमताओं के साथ उच्च ऊंचाई वाले दीर्घकालिक मुकाबले हेतु किया गया है। यह विमान कई क्षमताओं से लैस होने के कारण कठिन परिस्थितियों में भी मिशन को पूरा करने की क्षमता रखता है। यह यूएवी पुनर्जागरण, निगरानी,  युद्ध समर्थन, मिसाइलों को लॉन्च करना या अन्य हथियारों के मार्गदर्शन वाली सुविधाओं से लैस है। इस यूएवी की लंबाई 10 मीटर है तथा इसके पंख की लंबाई 22 मीटर है। यह यूएवी 15 घंटे तक लगातार उड़ान भरते हुए आसमान में रह सकता है।

    Points to be Remember:-

    • चीन के  गुआंग्‍डोंग प्रांत झुआई में आयोजित चीनी एयर शो, 2018 में चीन  में निर्मित अगली पीढ़ी के स्टेल्‍थ मानव रहित हवाई वाहन (यूएवी CH-7) का अनावरण किया गया।
    • इस यूएवी की लंबाई 10 मीटर है तथा इसके पंख की लंबाई 22 मीटर है। यह यूएवी 15 घंटे तक लगातार उड़ान भरते हुए आसमान में रह सकता है।

    By-Amar Singh Silawat


     

  • चीन ने अपने स्थाई चलित अंतरिक्ष स्टेशन की प्रतिकृति का अनावरण किया
    2018-11-10


    चीन ने अपने स्थाई चलित अंतरिक्ष स्टेशन की प्रतिकृति का अनावरण किया

    07.11.2018

    अंतरराष्ट्रीय समुदाय की कक्षा प्रयोगशला (आईएसएस) को प्रतिस्थापित करने हेतु चीन द्वारा अपने स्थाई चलित अंतरिक्ष स्टेशन की प्रतिकृति का अनावरण किया है।  इसके तहत चीन द्वारा निर्मित 60 टन वजनी प्रयोगशाला में स्थाई रूप से तीन अंतरिक्ष यात्री तैनात किए जाएंगे। इसके चालक दल जैविक तथा सूक्ष्‍मता अनुसंधान करने में सक्षम होंगे। वर्ष 1998 से  संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, कनाडा, यूरोप और जापान, आदि देशों के बीच हुए समझौतों से संचालित अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन वर्ष 2024 में रिटायर होने जा रहा है।

    इस नए अंतरिक्ष स्टेशन प्रतिकृति का वर्ष 2022 के आसपास पूरा होने की संभावना है तथा इसका जीवन 10 वर्ष होगा। यह 400 टन वजनी तथा एक फुटबॉल पिच जितना बड़ा होगा। यह प्रयोगशाला विज्ञान प्रयोगों हेतु सभी देशों के लिए खुली रहेगी।

    Points to be Remember:-

    • अंतरराष्ट्रीय समुदाय की कक्षा प्रयोगशला (आईएसएस) को प्रतिस्थापित करने हेतु चीन द्वारा अपने स्थाई चलित अंतरिक्ष स्टेशन की प्रतिकृति का अनावरण किया।
    • इस नए अंतरिक्ष स्टेशन प्रतिकृति का वर्ष 2022 के आसपास पूरा होने की संभावना है तथा इसका जीवन 10 वर्ष होगा।

    By-Amar Singh Silawat


     

  • स्मार्ट फोन द्वारा बाढ़ का पूर्वानुमान लगाना संभव
    2018-11-07


    06.11.2018

    प्राप्त जानकारी के अनुसार इजराइल की तेल अवीव यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए शोध में पाया गया है, कि स्मार्टफोन के द्वारा वायुमंडल के दबाव, तापमान और आर्द्रता आदि की जानकारी की स्थितियों के बारे में पता लगाया जाना संभव है। उनके द्वारा किया गया शोध को एटमॉस्फेरिक एंड सोलर टेरेस्ट्रियल फिजिक्स जनरल में प्रकाशित किया गया है। इजराइली यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर कोलिन प्राइस द्वारा बताया गया, कि स्मार्ट फोन के सेंसर पृथ्वी के गुरुत्व, उसके चुंबकीय क्षेत्र, वायुमंडलीय दाब, प्रकाश के स्तर, आद्रता, तापमान, ध्वनि के स्तर, आदि तमाम पर्यावरण की स्थितियों के बारे में लगातार निगरानी रखते हैं।

    Points to be Remember:-

    • इजराइल की तेल अवीव यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए शोध में पाया गया है, कि स्मार्टफोन के द्वारा वायुमंडल के दबाव, तापमान और आर्द्रता आदि की जानकारी की स्थितियों के बारे में पता लगाया जाना संभव है।

    Amar Singh Silawat


     

  • सौर ऊर्जा से सस्ती बिजली बनाने हेतु नए पदार्थ की खोज
    2018-11-07


    06.11.2018

    वैज्ञानिकों द्वारा एक ऐसे पदार्थ की खोज की गई है, जो सूर्य के ताप से रात के वक्त एवं आसमान में बादल छाए रहने पर भी सस्ती सौर ऊर्जा पैदा करने में सक्षम होगा। अनुसंधानकर्ताओं के द्वारा इस पदार्थ को सूर्य ऊर्जा से बिजली बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण खोज मानी जा रहा है। इसके माध्यम से तैयार की गई बिजली का खर्च बहुत कम होने तथा पर्यावरण के अनुकूल रहने की संभावना व्‍यक्‍त की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार अनुसंधानकर्ताओं ने सौर ऊर्जायुक्‍त बिजली को सस्‍ता बनाने हेतु टर्बाइन इंजन को उसी मात्रा के ताप में ज्‍यादा बिजली पैदा करने के लिए इंजन तेज चलाने के दौरान निकलने वाली अधिक ताप को कंट्रोल करने हेतु सिरामिक जरकोनियम तथा टंगस्टन धातु के मिश्रण से एक ऐसा पदार्थ तैयार किया है, जो अत्यधिक ताप पर भी उसी दशा में बना रहेगा।

    Points to be Remember:-

    • वैज्ञानिकों द्वारा एक ऐसे पदार्थ की खोज की गई है, जो सूर्य के ताप से रात के वक्त एवं आसमान में बादल छाए रहने पर भी सस्ती सौर ऊर्जा पैदा करने में सक्षम होगा।
    • अनुसंधानकर्ताओं ने सिरामिक जरकोनियम तथा टंगस्टन धातु के मिश्रण से एक ऐसा पदार्थ तैयार किया है, जो अत्यधिक ताप पर भी उसी दशा में बनी रहेगी।

    Amar Singh Silawat


     

  • नासा का केपलर स्पेस टेलीस्कोप रिटायर किया गया
    2018-11-07


    06.11.2018


    ग्रहों की खोज करने वाले केपलर स्पेस टेलीस्कोप मिशन को अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा द्वारा समाप्त करते हुए केपलर स्पेस टेलीस्कोप को 9 साल के बाद सेवा से रिटायर कर दिया गया। वैज्ञानिकों के अनुसार दूरबीन के द्वारा 26000 ग्रहों को खोजने में मदद के बाद इस दूरबीन को रिटायर कर दिया गया। इस दूरबीन की स्थापना वर्ष 2009 में की गई थी। नासा के एस्ट्रो फिजिक्स विभाग के निदेशक पॉल हर्ट्ज द्वारा बताया गया, कि दूरबीन का इंधन खत्म होने की सूचना दो सप्‍ताह पहले मिलने के बाद ईंधन समाप्‍त होने से पहले ही सारा डाटा एकत्रित कर लिया गया।

    Points to be Remember:-

    • ग्रहों की खोज करने वाले केपलर स्पेस टेलीस्कोप मिशन को अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा द्वारा समाप्त करते हुए केपलर स्पेस टेलीस्कोप को 9 साल के बाद सेवा से रिटायर कर दिया गया।

    Amar Singh Silawat


     

  • नेपाल तथा भारत के मध्य: पहली यात्री ट्रेन
    2018-11-06


    05.11.2018


    भारत तथा नेपाल के मध्य दिसंबर 2018 तक पहली यात्री ट्रेन की चलने की संभावना व्यक्त की गई है। यह ट्रेन दक्षिण पूर्व नेपाल के धनुसा जिले के कुर्था से बिहार के जयनगर तक संचालित की जाएगी। इस ट्रेन को चलाने के लिए ब्रॉडगेज ट्रेक का निर्माण किया जा रहा है, जो लगभग पूरा होने की कगार पर है। भारत तथा नेपाल के मध्य जयनगर स्टेशन पर एक अप्रवासन चेक पोस्ट बनाने की संभावना है। इसके बावजूद दोनों देशों के नागरिकों को सीमा पार करने के लिए कोई वीजा नहीं देना होगा।

    Points to be Remember:-

    • भारत तथा नेपाल के मध्य दिसंबर 2018 तक पहली यात्री ट्रेन की चलने की संभावना व्यक्त की गई है।
    • यह ट्रेन दक्षिण पूर्व नेपाल के धनुसा जिले के कुर्था से बिहार के जयनगर तक संचालित की जाएगी।

    By-Amar Singh Silawat


     

  • सिग्‍लेचर ब्रिज दिल्‍ली की जनता को समर्पित
    2018-11-06


    04.11.2018

    14 वर्ष के लम्‍बे इंतजार के बाद आखिरकार उत्‍तरी दिल्‍ली को उत्‍तरी पूर्वी दिल्‍ली तथा उत्‍तर पश्चिम दिल्‍ली से को जोड़ने वाले सिग्‍लेचर ब्रिज का दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उदघाट्न किया गया। इस ब्रिज को पर्यटन के हिसाब से भी डिजाइन किया गया है, जिसके शीर्ष पर जाकर देखने पर पूरे दिल्‍ली का विहंगम तस्‍वीर देखी जा सकेगी। इस ब्रिज की ऊँचाई करीब 73 मीटर है, जो कुतुबमीनार की ऊँचाई से भी दोगुनी है। पुल के शीर्ष पर पर्यटन के हिसाब से एक 22 मीटर ऊँचा गिलास का बाक्‍स लगाया गया है। जिसके ऊपर चार एलीवेटर की सहायता से एक बार में 50 पर्यटक आसानी से पहुँचकर पर्यटन का मजा उठा सकते हैं। इस ब्रिज के रखरखाव हेतु ब्रिज हेल्‍थ मॉनिटरिंग सिस्‍टम तैयार करते हुए 104 सेंसरों की मदद से पूरे ब्रिज की 24 घण्‍टे निगरानी की जाएगी। इन सभी सेंसरों को एक कंट्रोल रूम से कंट्रोल किया जाएगा।

    Points to be Remember:-

    • उत्‍तरी दिल्‍ली को उत्‍तरी पूर्वी दिल्‍ली तथा उत्‍तर पश्चिम दिल्‍ली से को जोड़ने वाले सिग्‍लेचर ब्रिज का उदघाटन किया गया।
    • इस ब्रिज की ऊँचाई करीब 73 मीटर है, जो कुतुबमीनार की ऊँचाई से भी दोगुनी है।
    • पुल के शीर्ष पर पर्यटन के हिसाब से एक 22 मीटर ऊँचा गिलास का बाक्‍स लगाया गया है। जिसके ऊपर चार एलीवेटर की सहायता से एक बार में 50 पर्यटक आसानी से पहुँचकर पर्यटन का मजा उठा सकते हैं।

    By-Amar Singh Silawat


     

  • अरुणाचल प्रदेश सुरक्षा एप लॉन्च
    2018-11-05


    03.11.2018


    आपातकाल में आम आदमी की सहायता हेतु अरुणाचल पुलिस द्वारा 'अरुणाचल प्रदेश पर्यटक पुलिस' तथा 'अरुणाचल सुरक्षा एप' लॉन्च किया गया। यह एप उपयोगकर्ता को निकटतम पुलिस स्टेशनों तथा संपर्क विवरण खोजने में सहायता करेगा। इसके माध्यम से आपातकाल में एसएमएस संदेश भी भेजा जा सकेगा।

    Points to be Remember:-

    • आम आदमी की सहायता हेतु अरुणाचल पुलिस द्वारा 'अरुणाचल प्रदेश पर्यटक पुलिस' तथा 'अरुणाचल सुरक्षा एप' लॉन्च किया गया।

    By-Amar Singh Silawat


     

  • भारतीय छात्र द्वारा कार पार्किंग हेतु एल्गॉरिद्म बनाया गया
    2018-11-03


    31.10.2018

    कार पार्किंग की बढ़ती समस्या को देखते हुए अमेरिका में पढ़ने वाले भारतीय छात्र के द्वारा गणित का प्रयोग करते हुए एक ऐसा एल्गॉरिद्म बनाया है, जो कार पार्किंग करने हेतु जगह तलाशने में मदद करेगा। भारतीय छात्र साईं निखिल रेड्डी मेट्टुपल्ली के द्वारा एल्गॉरिद्म को तैयार किया गया है। साईं को इससे पूर्व विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी ओपन हाऊस प्रतिस्पर्धा 2018 में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ था। वर्तमान में साईं हंट्सविले में अल्‍बामा यूनिवर्सिटी में बीई करने के बाद आगे की पढ़ाई कर रहे हैं। साईं के द्वारा तैयार एल्गॉरिद्म बिग डाटा एनालिटिक्स और सीखने की गहरी तकनीकों पर आधारित है।

    Points to be Remember:-

    • अमेरिका में पढ़ने वाले भारतीय छात्र साईं निखिल रेड्डी  मेट्टुपल्ली के द्वारा गणित का प्रयोग करते हुए एक ऐसा एल्गॉरिद्म बनाया है, जो कार पार्किंग करने हेतु जगह तलाशने में मदद करेगा।
    • साईं को इससे पूर्व विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी ओपन हाऊस प्रतिस्पर्धा 2018 में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ था।

    By Amar Singh Silawat


     

  • देश की पहली बिना इंजन वाली ट्रेन का परीक्षण सफल: T18
    2018-10-31


    29 October 2018

    मेक इन इंडिया के तहत बनी पूर्ण स्‍वदेशी तकनीक पर आधारित देश की पहली बिना इंजन वाली ट्रेन का इंटीग्रल कोच फैक्‍ट्री, चैन्‍नई में ही टेस्टिंग शुरू की गई। इस ट्रेन को T18 या ट्रेन 18 नाम दिया गया है, जो 160किमी/घण्‍टा की रफ्तार से चलने में सझम है। इस गाडी की मुख्‍य विशेसता यह है, कि यह 160किमी/घण्‍टे की स्‍पीड़ पकड़ने के लिए मात्र 197 सेकेण्‍ड का समय लेगी। यह गाड़ी दिल्‍ली से भोपाल रूट पर चलाई जाएगी। इस ट्रेन का निमार्ण इंटीग्रल कोच फैक्‍ट्री, चैन्‍नई के द्वारा किया गया है। सुरक्षा की दृष्टि से इस गाड़ी में 6 सीसीटीवी कैमरे लगाये गए हैं। ट्रेन की बॉड़ी स्‍टेनलैश स्‍टील से निर्मित की गई है। इसमें 360 डिग्री घूमने में सझम तथा पूरी तरह से आरामदायक, वाइ-फाई तथा अन्‍य सुविधा से लैस किया गया है। इस गाड़ी में यात्रियों के आराम के साथ ही मनोरंन का भी विशेष ध्‍यान दिया गया है।

    Points to be Remember:-

    • मेक इन इंडिया के तहत बनी पूर्ण स्‍वदेशी तकनीक पर आधारित देश की पहली बिना इंजन वाली ट्रेन T18 या ट्रेन 18 के नाम से जानी जाएगी।
    • इस गाडी की मुख्‍य विशेसता यह है, कि यह 160किमी/घण्‍टे की स्‍पीड़ पकड़ने के लिए मात्र 197 सेकेण्‍ड का समय लेगी।
    • इस ट्रेन का निमार्ण इंटीग्रल कोच फैक्‍ट्री, चैन्‍नई के द्वारा किया गया है।

    By Amar Singh Silawat


     

  • बिलासपुर-मनाली-लेह रेलवे लाइन पर होगा प्रेशराइज्डँ बोगियों का प्रयोग
    2018-10-31


    28 October 2018

    बिलासपुर-मनाली-लेह निर्माणाधीन रेलवे लाइन दुनिया की सबसे ऊँची रेलवे लाइन है। यह रेलवे ट्रेक 465कि.मी. लम्‍बी है, जो समुद्रतल से 5,360 मीटर ऊँचाई पर स्थित है। इस ट्रेक पर रेलवे द्वारा 74 सुरंग तथा 124 ब्रिजों  का निर्माण किया जाएगा।

    दुनिया की सबसे ऊँचाई पर स्थित रेलवे लाइन पर चलने वाली गाढ़ी के कोचों को हवाई जहाज के केबिन के समान डिजाइन किया जा रहा है। यह रेलवे लाइन चीन की सीमा के सबसे करीब स्थित है। रेलवे द्वारा इस ट्रेक पर चलने वाली गाड़ी में प्रेशराइज्‍ड कोच के इस्‍तमाल करने की योजना बनाई जा रही है। जिसका मुख्‍य उद्देश्‍य अधिक ऊँचाई पर यात्रियों को होने वाली ऑक्‍सीजन की कमी को दूर करना है। इस उद्देश्‍य की पूर्ती हेतु रेलवे रोलिंग स्‍टॉक तकनीक से युक्‍त कोचों के प्रयोग की योजना बना रही है। भारतीय रेल्‍वे ऐसी तकनीक वाले कोच निमार्ण कराने या करवाने हेतु कनाडा की बॉमबार्डियर इंक कम्‍पनी से सहायता ले सकती है।

    Points to be Remember:-

    • बिलासपुर-मनाली-लेह निर्माणाधीन रेलवे लाइन दुनिया की सबसे ऊँची रेलवे लाइन 465कि.मी. लम्‍बी है तथा समुद्रतल से 5,360 मीटर ऊँचाई पर स्थित है।
    • रेलवे द्वारा इस ट्रेक पर यात्रियों को अधिक ऊँचाई पर होने वाली ऑक्‍सीजन की कमी को दूर करने हेतु प्रेशराइज्‍ड कोच के इस्‍तमाल करने की योजना बना रही है।

    By Amar Singh Silawat


     

  • मेक इन इंडिया के तहत निर्मित विमान बुझाएगा जंगल की आग
    2018-10-31


    28 October 2018

    मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत देश में फायर फाइटिंग ड्रौन (एफएफडी) का निर्माण किया गया है। यह ड्रौन स्‍वचलित तकनीक के साथ कहीं भी लगी आग को पहचानने में सक्षम है। इस प्रकार के ड्रोन का प्रयोग पिछले कई वर्षों से अमेरिका,  इंग्‍लैंड, जापान तथा चीन जैसे देशों में किया जा रहा है। इस फायर फायटिंग विमान में एक केमिकल सिलेंडर लगाया गया है, जो आग लगे क्षेत्र में 300 वर्ग फीट के क्षेत्र में केमिकल का छिड़काव कर आग बुझाने में सझम है। भारत में इस ड्रोन का निमार्ण मेक इन इंडिया के तहत दक्षिण भारत में श्री सांई एयरोटेक इनोवेशन कम्‍पनी के द्वारा किया जा रहा है। केन्‍द्र सरकार के द्वारा इस ड्रोन को उडाने की अनु‍मति दे दी गई है तथा हिमाचल प्रदेश में इसका ट्रायल भी शुरू कर दिया गया है।

    Points to be Remember:-

    • मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत देश में फायर फाइटिंग ड्रौन (एफएफडी) का निर्माण किया गया।
    • यह ड्रौन स्‍वचलित तकनीक के साथ कहीं भी लगी आग को पहचानने में सक्षम है।
    • यह ड्रोन 300 वर्ग फीट के क्षेत्र में केमिकल का छिड़काव कर आग बुझाने में सझम है।
    • इस ड्रोन का निमार्ण मेक इन इंडिया के तहत दक्षिण भारत में श्री सांई एयरोटेक इनोवेशन कम्‍पनी के द्वारा किया जाएगा।

    By Amar Singh Silawat


     

  • 950 करोड़ में 17 डोर्नियर विमान अपड़ेट करेगा: HAL
    2018-10-31


    27 October 2018

    डिफेंस एक्बिजिशन काउंसिल (डीएसी) की बैठक में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की अघ्‍यक्षता में हिन्‍दुस्‍तान एरोनॉटिकल लिमिटेड (हाल) को 950 करोड़ रूपए में भारतीय तट रक्षक बल (आईसीजी) के 17 डोर्नियर विमानों को अपग्रेड करने की जिम्‍मेदारी सौंपे जाने का फैसला किया गया है। भारतीय तटरक्षक बल के डोर्नियर विमानों के बेड़े द्वारा समुद्री क्षेत्र की निगरानी में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई जाती रही है। सरकार के द्वारा इन डोर्नियर विमानों के बेडे को अत्‍याधुनिक तकनीक, स्‍पेयर पार्ट्स, विशेष परीक्षण उपकरण तथा विशेष रखरखाव उपकरणों के साथ नई तकनीक से अपग्रेड करने का फैसला किया गया है। इसके साथ ही उन विमानों में से तीन विमानों को प्रदूषण निगरानी प्रणाली के तहत अपग्रेड करने का फैसला लिया गया है।

    Points to be Remember:-

    • सरकार द्वारा हिन्‍दुस्‍तान एरोनॉटिकल लिमिटेड (हाल) को 950 करोड़ रूपए में भारतीय तट रक्षक बल (आईसीजी) के 17 डोर्नियर विमानों को अपग्रेड करने की जिम्‍मेदारी दी गई है।
    • सरकार द्वारा इन डोर्नियर विमानों के बेडे को अत्‍याधुनिक तकनीक, स्‍पेयर पार्ट्स, विशेष परीक्षण उपकरण तथा विशेष रखरखाव उपकरणों के साथ नई तकनीक से अपग्रेड करने का फैसला किया गया है।

    By Amar Singh Silawat


     

  • आईआईटी मद्रास ने तैयार किया देश का पहला माइक्रोप्रोसेसर
    2018-10-31


    27 October 2018

    आईआईटी मद्रास के द्वारा देश का पहला स्‍वदेशी माइक्रोप्रोसेसर विकसित करने में सफलता हासिल करने का दावा किया गया है। आईआईटी मद्रास ने इस माइक्रोप्रोसेसर को ‘’शक्ति’’ नाम दिया गया है। देश में निर्मित इस माइक्रोप्रोसेसर के प्रयोग से स्‍मार्ट फोन तथा अन्‍य कंप्‍यूटिंग उपकरणों के सस्‍ते होने की उम्‍मीद की जा रही है। आईआईटी मद्रास ने तैयार माइक्रोप्रोसेसर को रक्षा, परमाणु शक्ति और सरकारी एजंसियों आदि के द्वारा उपयोग किये जाने हेतु ज्‍यादा उपयोगी बताया गया है। ‘’शक्ति’’ नामक प्रोसेसरों का निमार्ण चंड़ीगढ़ स्थित भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की सेमी-कंडक्‍टर लैब (एससीएल) में किया जा रहा है।

    Points to be Remember:-

    • आईआईटी मद्रास के द्वारा देश का पहला स्‍वदेशी माइक्रोप्रोसेसर विकसित करने में कामियाबी हासिल की गई है।
    • आईआईटी मद्रास ने इस माइक्रोप्रोसेसर को ‘’शक्ति’’ नाम दिया है।
    • ‘’शक्ति’’ नामक प्रोसेसरों का निमार्ण चंड़ीगढ़ स्थित भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की सेमी-कंडक्‍टर लैब (एससीएल) में किया जा रहा है।

    By Amar Singh Silawat


     

  • देश में पुननिर्मित किया गया: सुखोई एसयू-30 एमकेआई
    2018-10-29


    27 October 2018

    नासिक स्थित वायुसेना के ओझर बेस रिपेयर डिपो में 26 अक्‍टूबर 2018 को देश में पुननिर्मित सुखोई एसयू-30 एमकेआई विमान को वायूसेना को सोंप दिया गया। इस विमान का निर्मार्ण पूरी तरह से भारत में किया गया है। यह विमान दो इंजन वाला बहुउद्देशीय उच्‍च क्षमता का है। इस विमान का निमार्ण रूस में किया जाता है, जिसे भारतीय कंपनी हिन्‍दुस्‍तान एयरोनॉटिक्‍स लिमिटेउ (एचएएल) के लाइसेंस के तहत बनाया गया है। जानकारी के अनुसार ब्रहमोस मिसाइल को प्रक्षेपित करने हेतु 40 सुखोई विमानों को वर्ष 2020 तक तैयार करने का कार्य किया जाना है।

    Points to be Remember:-

    • नासिक स्थित वायुसेना के ओझर बेस रिपेयर डिपो में 26 अक्‍टूबर 2018 को देश में पुननिर्मित सुखोई एसयू-30 एमकेआई विमान को वायूसेना को सोंप दिया गया।
    • इस विमान का निमार्ण रूस में किया जाता है, जिसे भारतीय कंपनी हिन्‍दुस्‍तान एयरोनॉटिक्‍स लिमिटेउ (एचएएल) के लाइसेंस के तहत बनाया गया है।

    By Amar Singh Silawat


     

  • वर्ष 2022 तक इसरो का अंतरिक्ष में मानव भेजने का लक्ष्‍य
    2018-10-28


    26 October 2018

    इसरो प्रमुख डॉ. शिवन के द्वारा बताया गया, कि इसरो वर्ष 2021 तक स्‍वदेशी तकनीक विकसित करने में सफलता हासिल कर चंद्र अभियान के तहत अंतरिक्ष में मानव भेजने में सफलता हासिल करेगा। उनके द्वारा बताया गया, कि केन्‍द्र की डिजिटल इंडिया योजना को प्रभावी बनाने हेतु इसरो 2 सेटेलाइट नवम्‍बर एवं दिसम्‍बर 2018 में तथा अगले 2 सेटेलाइट वर्ष 2019 में कुल चार सेटेलाइट छोडने की तैयारी कर रहा है।

    उनके द्वारा जानकारी दी गई कि भविष्‍य में इसरो देश के 6 शहरों में रिसर्च सेंटर तथा 6 अन्‍य शहरों में इक्विपमेंट सेंटर खोलने की योजना बना रहा है। इक्विपमेंट सेंटर ऐसे शहरों में खोले जाऐंगे जहॉं उद्योग, विश्‍वविद्यालय, इंस्‍टीट्यूट अधिक मात्रा में हैं तथा जहॉं ऐसे सेंटरों की मदद से अच्‍छा कार्य किया जा सकता हो।

    इक्विपमेंट सेंटर खोलने हेतु देश में अगरतला, जालंधर, इंदौर, नागपुर, कोच्चि तथा भुवनेश्‍वर आदि 6 शहरों का चयन किया गया है। इसके अलावा रिसर्च सेंटर हेतु गुवाहाटी, जयपुर, कन्‍याकुमारी, वाराणसी, कुरूक्षेत्र एवं पटना आदि 6 शहरों का चयन किया गया है।  

    Points to be Remember:-

    • इसरो प्रमुख डॉ. शिवन के मुताबिक इसरो वर्ष 2021 तक स्‍वदेशी तकनीक विकसित करने में सफलता हासिल कर चंद्र अभियान के तहत अंतरिक्ष में मानव भेजने में सफलता हासिल करेगा।
    • दी गई जानकारी के तहत भविष्‍य में इसरो देश के 6 शहरों में रिसर्च सेंटर तथा 6 अन्‍य शहरों में इक्विपमेंट सेंटर खोलने की योजना बना रहा है।

    By Amar Singh Silawat


     

  • इटली: कार्बन कैप्‍चर प्‍लांट की शुरूआत
    2018-10-28


    26 October 2018

    इटली के ट्रोआ कस्‍बे में वातावरण से कार्बनडाइआक्‍साइड सोखकर उसे कार्बन न्‍यूट्रल ईंधन में बदलने वाला पायलट प्‍लांट शूरू किया गया है। कनाडा के एक्‍वामिश और स्विटजरलैंड में भी इसी तरह की फैक्‍ट्री की शुरूआत की गई है। इनका मुख्‍य कार्य पर्यावरण से कार्बनडाइआक्‍साइड सोखकर ग्रीन हाऊस प्रभाव के खतरे को कम करना है। सोखे गए कार्बन का प्रयोग साफ ईंधन के साथ कई सारे उत्‍पाद बनाने में किया जाएगा। इस इंडस्‍ट्री का पहला उत्‍पाद कार्बन रहित ईंधन होगा, जिसे किसी भी वाहन में उपयोग किया जा सकेगा।

    Points to be Remember:-

    • इटली के ट्रोआ कस्‍बे में वातावरण से कार्बनडाइआक्‍साइड सोखकर उसे कार्बन न्‍यूट्रल ईंधन में बदलने वाले पायलट प्‍लांट की शूरूआत की गई।
    • इन प्‍लांट का मुख्‍य कार्य पर्यावरण से कार्बनडाइआक्‍साइड सोखकर ग्रीन हाऊस प्रभाव के खतरे को कम करना है।
    • सोखे गए कार्बन का प्रयोग साफ ईंधन के साथ कई सारे उत्‍पाद बनाने में किया जाएगा।

    By Amar Singh Silawat